सहारनपुर के बहुचर्चित देवबंद गैंगरेप मामले में 11 साल बाद बड़ा फैसला: दो तत्कालीन पुलिसकर्मी दोषी करार

सहारनपुर के देवबंद में 11 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो तत्कालीन पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया। सजा का ऐलान आज।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद में लगभग 11 साल पुराने एक बहुचर्चित महिला सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। पुलिसकर्मियों पर सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाने वाली पीड़िता को इस लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई के बाद इंसाफ की पहली बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। सहारनपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने तत्कालीन एसएचओ ब्रजमोहन यादव और तत्कालीन इंस्पेक्टर वेदपाल सिंह को दोषी ठहराया है। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को तुरंत पुलिस ने अदालत परिसर से ही हिरासत में लेकर जिला जेल भेज दिया है।

🚨 क्या है 6 अगस्त 2015 की घटना? थाने के क्वार्टर में ले जाकर दिए गए थे अंजाम

घटना का विवरण और पृष्ठभूमि:

  • थाने में प्रवेश: मामला 6 अगस्त 2015 का है। देवबंद की ही रहने वाली एक पीड़िता अपने पति की गिरफ्तारी के बाद उसके संबंध में जानकारी लेने के लिए देवबंद कोतवाली गई थी। वह अपने परिवार की दो अन्य महिला सदस्यों के साथ थाने पहुंची थी।

  • क्वार्टर में ले जाने का आरोप: आरोप है कि उस समय थाने में तैनात दरोगा पंकज धामा ने एसएचओ से मिलवाने की बात कहकर उसे थाने के ही एक क्वार्टर में पहुंचा दिया। वहां तत्कालीन एसएचओ ब्रजमोहन यादव, एसआई वेदपाल सिंह, दरोगा पंकज धामा और एक अन्य सिपाही पहले से मौजूद थे।

  • सामूहिक दुष्कर्म: पीड़िता का गंभीर आरोप था कि उन चारों पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मिलकर सामूहिक दुष्कर्म की घृणित घटना को अंजाम दिया। इस दौरान जब उसके साथ आई महिला ने विरोध किया, तो उसके साथ भी मारपीट की गई।

🔄 स्थानीय पुलिस से निराशा के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा; सीबीसीआईडी जांच और प्रोटेस्ट पिटीशन

न्याय के लिए लंबा संघर्ष:

  • उच्च न्यायालय की दखल: घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद पीड़िता ने तत्कालीन एसएसपी से गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिलने पर उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के कड़े हस्तक्षेप के बाद मामले में एफआईआर दर्ज हुई और जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई।

  • अदालत का संज्ञान: पीड़िता के अधिवक्ता राजीव तोमर के अनुसार, सीबीसीआईडी ने अपनी जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी, जिसके खिलाफ पीड़िता की ओर से अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आईपीसी की धारा 376डी और 506 के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमे का संज्ञान लिया।

⚖️ चार में से दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ चला ट्रायल; आज सुनाई जाएगी सजा

अदालत की कार्रवाई और प्रावधान:

  • दोषियों का दायरा: शुरुआती आरोपों में चार पुलिसकर्मियों (एसएचओ ब्रजमोहन यादव, एसआई वेदपाल सिंह, दरोगा पंकज धामा और एक अन्य सिपाही) के नाम शामिल थे। हालांकि, दरोगा पंकज धामा ने खुद को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित करने के लिए मेडिकल दस्तावेज पेश किए, जबकि चौथे सिपाही के खिलाफ मुकदमा आगे नहीं बढ़ सका। इस तरह ट्रायल मुख्य रूप से ब्रजमोहन यादव और वेदपाल सिंह के खिलाफ चला।

  • सजा का प्रावधान: अधिवक्ता राजीव तोमर ने बताया कि आईपीसी की धारा 376डी के तहत न्यूनतम 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही भारी जुर्माने और पीड़िता को उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी की गई है।

🗣️ 11 साल के संघर्ष के बाद पीड़िता को मिला संतोष; दोषियों को कड़ी सजा की उम्मीद

पीड़िता की प्रतिक्रिया:

  • न्याय की आस: 11 साल तक इस कठिन कानूनी लड़ाई को लड़ने वाली पीड़िता ने अदालत के इस फैसले पर संतोष जताया है। उसने बताया कि इस लंबे सफर में उसे भारी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है। पीड़िता और उसके परिजनों ने उम्मीद जताई है कि अदालत इन भ्रष्ट और दागदार पुलिसकर्मियों को कठोर से कठोर सजा सुनाएगी।

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