सेक्टर-116 में ‘आर्यमंडल पार्क’ पर सवाल: प्रस्तावित जमीन पर कूड़े का ढेर और जलभराव, निवासी बोले—क्या 5% आबादी सेक्टर को विकास का अधिकार नहीं?

आर्यमंडल पार्क का निर्माण बजट के नाम पर टलने से बढ़ी नाराजगी, प्रस्तावित भूमि पर कूड़ा और गंदा पानी जमा होने का आरोप

न्यूज डेस्क। नोएडा। राजेश / विवेक। नोएडा के सेक्टर-116 में प्रस्तावित आर्यमंडल पार्क को लेकर स्थानीय निवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। निवासियों का आरोप है कि जिस जमीन पर एक सुंदर और भव्य पार्क विकसित करने की योजना बताई गई थी, उसके एक बड़े हिस्से में कूड़ा डाला जा रहा है, जबकि शेष खाली क्षेत्र में नालियों का गंदा पानी जमा रहने से दुर्गंध, मच्छरों और गंदगी की समस्या बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें आशंका थी कि 5 प्रतिशत आबादी वाले सेक्टर में प्रस्तावित पार्क की योजना शायद धरातल पर नहीं उतर पाएगी। अब पार्क निर्माण को बजट से जोड़कर टाले जाने की खबरों के बाद उनकी यह आशंका और मजबूत हुई है।


प्रस्तावित पार्क की जमीन पर कूड़ा डालने का आरोप
निवासियों के मुताबिक आर्यमंडल पार्क के लिए प्रस्तावित भूमि के एक बड़े हिस्से में लगातार कूड़ा डाले जाने से वहां धीरे-धीरे कचरे का ढेर बनता जा रहा है। इससे आसपास रहने वाले परिवारों को दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का आरोप है कि जमीन के दूसरे हिस्से में नालियों का गंदा पानी लंबे समय तक जमा रहता है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा भी पैदा हो सकता है।
‘क्या 5% आबादी सेक्टर के नागरिकों के अधिकार अलग हैं?’
सेक्टरवासियों ने सवाल उठाया है कि क्या 5 प्रतिशत आबादी योजना के तहत विकसित सेक्टरों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ वातावरण, पार्क, हरियाली और बेहतर नागरिक सुविधाएं पाने का समान अधिकार नहीं है?
निवासियों का कहना है कि किसानों की जमीन के अधिग्रहण से नोएडा जैसे आधुनिक शहर का विस्तार संभव हुआ। ऐसे में उन्हीं किसानों और उनके परिवारों के लिए विकसित आबादी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी उचित नहीं कही जा सकती।
उनका कहना है कि विकास योजनाओं में किसी सेक्टर की सामाजिक या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। शहर के प्रत्येक नागरिक को साफ-सफाई, हरियाली और बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राधिकरण की प्राथमिकताओं में होना चाहिए।
VIP और 5% सेक्टर में विकास का अंतर क्यों?
स्थानीय निवासियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि विकसित और प्रमुख सेक्टरों की तुलना में 5 प्रतिशत आबादी वाले क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण की योजनाओं की रफ्तार धीमी क्यों रहती है।
लोगों का कहना है कि “5% आबादी वाले सेक्टरों में रहने वाले लोग भी नोएडा के नागरिक हैं और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक नहीं समझा जाना चाहिए। विकास का अधिकार सभी का है—चाहे कोई VIP सेक्टर हो या किसानों की 5% आबादी वाला सेक्टर।”
प्राधिकरण से कार्रवाई की मांग
सेक्टर-116 के निवासियों ने नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि आर्यमंडल पार्क की वास्तविक स्थिति और निर्माण योजना को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही प्रस्तावित भूमि पर कूड़ा डालना तत्काल बंद कराकर वहां जमा कचरा हटाया जाए, जलभराव और नालियों के गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए तथा पार्क निर्माण के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए।

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