सेक्टर-47 कालीबाड़ी मंदिर में सजने लगीं मां दुर्गा की मूर्तियां, बंगाल के कारीगर दे रहे हैं अंतिम रूप
चंडीगढ़ के सेक्टर-47 कालीबाड़ी मंदिर में नवरात्र के लिए मां दुर्गा की मूर्तियां तैयार हो रही हैं। बंगाल से आए कारीगर पारंपरिक और ईको-फ्रेंडली मूर्तियां बना रहे हैं।
शारदीय नवरात्र की शुरुआत में अब कुछ ही दिन शेष हैं, जिसके चलते चंडीगढ़ शहर में मां दुर्गा की आराधना और पूजा-पंडालों की तैयारियां काफी तेज हो गई हैं। शहर के सेक्टर-47 स्थित प्रसिद्ध कालीबाड़ी शिव बैकुंठ धाम मंदिर में इन दिनों बंगाल की पारंपरिक शैली में मां दुर्गा की भव्य मूर्तियां तैयार करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। मंदिर परिसर में हर तरफ मूर्तियां ही मूर्तियां नजर आ रही हैं और बाहर से आए कुशल कारीगर दिन-रात मेहनत करके इन कलाकृतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
🎨 बंगाल से पहुंचे विशेष कारीगर: पारंपरिक कला से तैयार हो रही हैं मूर्तियां, कीमत पहुंच रही है 50 हजार तक
मां दुर्गा की पारंपरिक बंगाली शैली की मूर्तियां बनाने के लिए विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से कारीगर चंडीगढ़ पहुंचे हैं। मूर्तिकार तखन अधिकारी और सुभाष अधिकारी का कहना है कि वे बचपन से ही अपनी पीढ़ियों की इस पारंपरिक कला से जुड़े हैं। मूर्तियों को बनाने में बंगाल से मंगाई गई विशेष मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। आकार देने के बाद चेहरे के भाव, आभूषण और बारीक नक्काशी का काम हाथों से किया जाता है। डिजाइन और आकार के आधार पर इन मूर्तियों की कीमत 50 हजार रुपये तक पहुंच रही है, जिन्हें तैयार करने में काफी समय और मेहनत लगती है।
🌿 पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान और तीन राज्यों से पहुंच रहे खरीदार: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र
कालीबाड़ी मंदिर में तैयार होने वाली इन कलात्मक मूर्तियों की मांग केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से भी खरीदार यहां पहुंच रहे हैं। इस बार कारीगरों द्वारा पर्यावरण का विशेष ध्यान रखते हुए पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि विसर्जन के दौरान प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। नवरात्रों की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है, ऐसे में खरीदारों की आवाजाही बढ़ने से मंदिर परिसर में अभी से भारी रौनक देखने को मिल रही है।