स्क्रीन पर दिखने वाले 100 डॉलर नहीं, असल में 145 डॉलर प्रति बैरल है कच्चे तेल की कीमत; कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्ट
कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की स्क्रीन कीमत और असल कीमत में बड़ा अंतर है। शिपिंग कॉस्ट और युद्ध के कारण कीमतें काफी ज्यादा हैं।
भारत सहित पूरी दुनिया में कच्चा तेल (Crude Oil) हमेशा से एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है। कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की कीमतों के साथ वैश्विक महंगाई पर पड़ता है। इस बीच, कोटक सिक्योरिटीज की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक स्क्रीन पर कच्चे तेल की जो कीमत दिखाई देती है, असल में वह उससे काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि स्क्रीन पर क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल दिख रही है, तो शिपिंग और अन्य खर्चों को मिलाकर उसकी वास्तविक कीमत लगभग 145 डॉलर प्रति बैरल तक बैठती है, जिससे दोनों कीमतों में 45 डॉलर प्रति बैरल का बड़ा अंतर आ रहा है।
🚢 बढ़ती शिपिंग कॉस्ट और युद्ध का असर: क्यों बढ़ गया है कोटेड और फिजिकल कीमतों के बीच का यह भारी अंतर?
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटीज रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, फिजिकल क्रूड ऑयल की कीमतें बेंचमार्क रेट्स से काफी ऊपर चल रही हैं क्योंकि माल ढुलाई (VLCC फ्रेट रेट्स) 1 मिलियन डॉलर के पार जा चुकी है, जिससे प्रति बैरल करीब 25 डॉलर या उससे ज्यादा की लागत बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि स्क्रीन पर दिखने वाली कीमत लगभग एक काल्पनिक या बेंचमार्क कीमत होती है, जबकि असल डील अलग रेट पर होती है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध और वेस्ट एशिया के संघर्ष के कारण मार्केट में प्रीमियम बना हुआ है, जिसमें यूक्रेन युद्ध का असर क्रूड मार्केट पर ज्यादा गहरा है।
🇮🇳 जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल के बीच भारत की स्थिति मजबूत: सोने-चांदी और ब्याज दरों को लेकर भी सामने आए अनुमान
वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल के बावजूद भारत की स्थिति काफी सुरक्षित और मजबूत बनी हुई है। देश में ऑयल की सप्लाई सुचारू रूप से उपलब्ध है और रिफाइंड प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट करने के लिए हमारे पास पर्याप्त रिफाइनिंग क्षमता भी है, जो भारत को फिजिकल कमी के संकट से बचाती है। वहीं, सोने-चांदी की कीमतों पर बात करते हुए एक्सपर्ट ने कहा कि जब तक अमेरिकी यील्ड ऊंची बनी रहेगी, तब तक इनमें सीमित दायरे में ही कारोबार देखने को मिलेगा। इसके अलावा, सिस्टम में मौजूद भारी लिक्विडिटी को देखते हुए आने वाले समय में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना भी जताई गई है।