हरियाणा चुनाव 2026: मतदाता सूची से हटेंगे 33 लाख नाम, बदलेगी तस्वीर?
हरियाणा में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण! 33.66 लाख नाम सूची से हटने की संभावना। जानें कब तक जमा करें गणना प्रपत्र और कैसे प्रभावित होगा विधानसभा चुनाव।
चंडीगढ़ : हरियाणा में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान अब केवल एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा और दशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अभियान बनता जा रहा है। अब तक हुए सत्यापन में 33.66 लाख मतदाता ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। यह प्रदेश के कुल मतदाताओं का लगभग 16.30 प्रतिशत है। यदि अंतिम सूची में भी यही स्थिति बनी रहती है तो हर विधानसभा क्षेत्र से औसतन 37 हजार से अधिक मतदाता कम हो जाएंगे। पिछले चुनावों में अनेक सीटों पर जीत-हार का अंतर इससे काफी कम रहा था। ऐसे में संशोधित मतदाता सूची राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन और प्रत्याशियों के समीकरणों पर सीधा प्रभाव डाल सकती है।
रोज बढ़ रही संभावित हटने वाले मतदाताओं की संख्या
निर्वाचन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि संभावित रूप से हटने वाले मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंगलवार तक यह संख्या 33.36 लाख थी, जो बुधवार तक बढ़कर 33.66 लाख हो गई। यानी एक ही दिन में करीब 30 हजार नए नाम इस सूची में जुड़ गए। अधिकारियों का अनुमान है कि विशेष पुनरीक्षण अभियान पूरा होने तक यह संख्या 40 लाख के आसपास भी पहुंच सकती है। सत्यापन के दौरान ऐसे मतदाता चिन्हित किए जा रहे हैं जो अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है अथवा जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं।
99.83 प्रतिशत मतदाताओं तक पहुंचे गणना प्रपत्र
निर्वाचन विभाग ने वितरण कार्य लगभग पूरा कर लिया है। 15 जुलाई की शाम चार बजे तक प्रदेश के 2.06 करोड़ मतदाताओं में से 99.83 प्रतिशत तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके थे। हालांकि इन प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है। अब तक केवल 82.53 प्रतिशत प्रपत्रों का ही डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सका है। लगभग 2.41 लाख मतदाताओं का सत्यापन और डिजिटाइजेशन अभी शेष है। इसी को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने गणना प्रपत्र जमा कराने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 24 जुलाई कर दी है।
फरीदाबाद और गुरुग्राम में सबसे अधिक असर
संभावित रूप से मतदाता सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक फरीदाबाद जिले में दर्ज की गई है, जहां 5.09 लाख नाम हटने की संभावना है। इसके बाद गुरुग्राम में 4.01 लाख, सोनीपत में 2.44 लाख, करनाल में 2.12 लाख और पानीपत में 1.89 लाख मतदाता इस श्रेणी में आए हैं। प्रतिशत के आधार पर भी फरीदाबाद, गुरुग्राम और पंचकूला सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। वहीं डिजिटाइजेशन कार्य में फतेहाबाद, महेंद्रगढ़ और चरखी दादरी ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला इस कार्य में अभी पीछे हैं।
24 जुलाई तक चलेगा घर-घर सत्यापन अभियान
निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार 24 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर गणना प्रपत्र एकत्र करेंगे। इसके बाद 31 जुलाई को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।प्रारूप सूची जारी होने के बाद 30 अगस्त तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इनका निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा और सभी दावों-आपत्तियों के समाधान के बाद 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
मतदाताओं के लिए जरूरी अलर्ट
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के सभी मतदाताओं से अपील की है कि जिन्होंने अभी तक अपना गणना प्रपत्र जमा नहीं कराया है, वे 24 जुलाई तक इसे अपने बीएलओ के पास या ऑनलाइन माध्यम से अवश्य जमा करा दें। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रपत्र जमा नहीं किया गया तो संबंधित मतदाता का नाम 31 जुलाई को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सकेगा, जिससे उसके मतदान अधिकार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
चुनावी तस्वीर बदल सकती है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाखों नाम अंतिम सूची से हटते हैं तो कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं का संतुलन बदल जाएगा। इससे राजनीतिक दलों को अपने बूथ स्तर के संगठन, मतदाता संपर्क अभियान और चुनावी रणनीति में नए सिरे से बदलाव करने पड़ सकते हैं। यही कारण है कि इस बार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रियाओं में से एक माना जा रहा है।