हरियाणा में बिल्डिंग प्लान मंजूरी अब 100% ऑनलाइन; जानें नए नियम और राहत

हरियाणा सरकार ने बिल्डिंग प्लान मंजूरी को 100% ऑनलाइन किया। 1000 वर्ग मीटर तक के प्लॉटों के लिए स्व-प्रमाणीकरण सुविधा और भुगतान ब्याज में 2% की कटौती।

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य में भवन निर्माण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। अब आवासीय और व्यावसायिक भवनों के बिल्डिंग प्लान (नक्शा) की स्वीकृति के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को 100% ऑनलाइन कर दिया है, जिससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी बल्कि समय की भी भारी बचत होगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में शहरी स्थानीय निकाय विभाग की बैठक में निर्देश दिए कि बिल्डिंग प्लान की मंजूरी की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। छोटे और मध्यम आकार के रिहायशी प्लॉटों (1000 वर्ग मीटर तक और 15 मीटर ऊंचाई) के लिए अब ‘स्व-प्रमाणीकरण’ की सुविधा दी गई है। यानी आर्किटेक्ट द्वारा तैयार नक्शा ऑनलाइन जमा करते ही काम शुरू किया जा सकेगा।

हरियाणा शहर विकास प्राधिकरण (HSVP) ने अपना नया OBPAS (Online Building Plan Approval System) पोर्टल लॉन्च किया है। यह पोर्टल ऑटोमैटिक तरीके से ‘हरियाणा बिल्डिंग कोड’ के अनुसार नक्शे की जांच करता है। अधिकारियों के लिए समय सीमा (Timeline) निर्धारित की गई है। यदि निर्धारित समय में मंजूरी नहीं मिलती, तो जवाबदेही तय की जाएगी।

HSVP (हुडा) ने प्लॉटों की नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और ‘बिडर-फ्रेंडली’ बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। देरी से भुगतान पर लगने वाले ब्याज को 14% से घटाकर 12% कर दिया गया है, जिससे खरीदारों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।अब प्लॉटों का आवंटन केवल ई-नीलामी और ई-ड्रॉ के माध्यम से ही किया जा रहा है ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।सरकार ने बुनियादी ढांचे पर बढ़ते बोझ को देखते हुए 4 मंजिला (Stilt + 4) मकानों के लिए सड़क की चौड़ाई की शर्त लागू कर दी है।अब 10 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क वाले प्लॉटों पर ही चौथी मंजिल बनाने की अनुमति मिलेगी। यह नियम गुरुग्राम को छोड़कर पूरे हरियाणा में प्रभावी है।

पहले नक्शा पास कराने में महीनों लगते थे, अब यह काम कुछ ही दिनों में हो जाएगा।आप अपने आवेदन की स्थिति (Status) ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं।दलालों और बिचौलियों के खत्म होने से अतिरिक्त खर्चों में कमी आएगी।

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