हरियाणा रोडवेज का रूप बनाकर चल रही फर्जी प्राइवेट बस पकड़ी, 81 हजार का चालान
दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) पर हरियाणा रोडवेज के रंग-रूप में चल रही फर्जी राजस्थान नंबर की प्राइवेट बस पकड़ी गई। RTO ने 81 हजार का चालान कर बस इंपाउंड की।
रेवाड़ी : दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर बावल ट्रैफिक पुलिस ने वाहन जांच के दौरान हरियाणा रोडवेज के रंग-रूप में संचालित की जा रही एक निजी बस को पकड़ा। राजस्थान नंबर की यह बस दिल्ली से सवारियां लेकर जयपुर जा रही थी। पुलिस ने बस को जांच के लिए रोका तो उसके निजी बस होने का पता चला। इसके बाद बस को आगे की कार्रवाई के लिए आरटीओ कार्यालय, बावल के सुपुर्द कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार बस का नंबर RJ 14 PH 2306 है। बावल ट्रैफिक पुलिस की टीम NH-48 पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान राजस्थान नंबर की बस को रोककर दस्तावेजों और अन्य पहलुओं की जांच की गई। बस का बाहरी रंग-रूप हरियाणा रोडवेज की बसों जैसा दिखाई दे रहा था, जबकि यह निजी बस थी। आरटीओ विभाग ने मामले में कार्रवाई करते हुए बस के चालक एवं परिचालक पर 81 हजार रुपये का चालान किया। इसके साथ ही बस को इंपाउंड कर दिया गया। बस के परमिट, दस्तावेज और रंग-रूप से संबंधित नियमों की भी जांच की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद NH-48 पर संचालित अन्य निजी बसों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बावल से दिल्ली और जयपुर के बीच बड़ी संख्या में निजी बसें संचालित होती हैं। ऐसे में
परिवहन विभाग को यह जांच करनी चाहिए कि इन बसों के पास वैध परमिट और आवश्यक दस्तावेज हैं या नहीं तथा उनका रंग-रूप निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं। हरियाणा रोडवेज जैसा रंग-रूप होने से यात्रियों में भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में विभाग को NH-48 पर चलने वाली अन्य निजी बसों की भी व्यापक जांच करनी चाहिए। यदि किसी अन्य बस में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि नियमों के विपरीत चल रही बसें यदि लंबे समय से मार्ग पर संचालित हो रही थीं तो उनकी निगरानी क्यों नहीं हो सकी। इस मामले में परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बावल ट्रैफिक पुलिस के एएसआई अनिल ने बताया कि जांच के दौरान उक्त निजी बस को हरियाणा रोडवेज के रंग-रूप में संचालित पाया गया था। बस को आरटीओ कार्यालय के सुपुर्द किया गया, जहां विभाग की ओर से कार्रवाई करते हुए 81 हजार रुपये का चालान किया गया और बस को इंपाउंड कर दिया गया।