होर्मुज स्ट्रेट खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, शेयर बाजार और सोने पर असर
अमेरिका के दबाव कम करने पर होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार ईरान। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से शेयर बाजार और सोने पर असर।
ईरान ने हाल ही में कहा है कि अगर अमेरिका अपना मिलिट्री दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा ले, तो वह होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए तैयार है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि अगर वॉशिंगटन अपना मिलिट्री दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक सात दिनों के अंदर इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोल सकता है.
इस रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई; ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट से पता चला कि तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिका अपना मिलिट्री दबाव कम करे. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि तेहरान का प्रस्ताव 16 सितंबर को बिचौलियों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था. ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका-ईरान विवाद को खत्म करने के समझौते पर न्यूयॉर्क में बिचौलियों के जरिए बातचीत की जा सकती है.
रविवार को ईरान ने किसी भी मिलिट्री हमले का कड़ा जवाब देने की धमकी दी थी. यह धमकी तब दी गई जब ईरान की मिलिट्री सेंट्रल कमांड ने कहा कि उन्हें पता चला है कि अमेरिका क्षेत्रीय देशों की मदद से मिलिट्री ऑपरेशन फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है. अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलता है तो इसका असर भारत के शेयर बाजार और सोने और चांदी की कीमतों में किस तरह से देखने को मिल सकता है, आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…
शेयर बाजार पर क्या पड़ सकता है असर?
होर्मुज स्ट्रेट एक अहम समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया की एनर्जी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. तेल से भरपूर फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाले इस संकरे रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ (20 मिलियन) बैरल तेल – जो दुनिया की कुल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है – और दुनिया के LNG व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.
इस अहम समुद्री रास्ते के फिर से खुलने से तेल की कीमतें काफी कम हो सकती हैं, जिससे कच्चे तेल के दुनिया के तीसरे सबसे बड़े आयातक देश भारत को मैक्रो-इकोनॉमिक स्तर पर बड़ी राहत मिल सकती है. जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से भारतीय शेयर बाजार में ट्रेंड बदल सकता है, जो हाल के दिनों में एक दायरे में ही घूम रहा है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने से घरेलू बाजार को बड़ा फायदा होगा. प्रमुख इंडेक्स में अच्छी बढ़त दिख सकती है और वे अपने कंसोलिडेशन फेज (स्थिरता के दौर) से बाहर निकल सकते हैं.
रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के SVP अजीत मिश्रा की भी यही राय है. मिश्रा ने कहा कि अगर यह होर्मुज स्ट्रेट खुलता है, तो घरेलू बाजार में अच्छी बढ़त दिख सकती है. ईरान ने खुद इसे खोलने का प्रस्ताव दिया है, बशर्ते अमेरिका अपना दबाव कम करे. इस दिशा में पॉजिटिव घटनाक्रम बाजार को कंसोलिडेशन से बाहर निकलने में मदद कर सकता है.
वहीं दूसरी ओर मिश्रा ने यह भी कहा कि लगातार बढ़त के लिए तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आनी होंगी और कम बनी रहनी होंगी. निफ्टी पिछले दो सालों से गिरावट के दौर में है. इस साल अब तक इंडेक्स में लगभग 11 फीसदी की गिरावट आई है.
सोने की कीमतों पर असर
होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने से तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे महंगाई का डर कम होगा और US फ़ेडरल रिजर्व और दुनिया के दूसरे बड़े सेंट्रल बैंकों द्वारा मॉनेटरी पॉलिसी को और सख्त करने की संभावना कम हो जाएगी. यह सोने की कीमतों के लिए एक अच्छी बात होगी.
सेबी-रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि तेल की कीमतों में गिरावट से ब्याज दरें बढ़ने का डर खत्म हो जाएगा, जिससे सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं. MCX पर सोने की कीमतें 1,53,000-1,54,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं.
कीमतों में बढ़त बनाए रखने के लिए, इसे 1,54,000 रुपए से ऊपर बंद होना होगा. त्रिवेदी ने कहा कि इन जियोपॉलिटिकल वजहों से सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है. सोने की कीमत 1,51,000 रुपए से 1,54,500 रुपए के दायरे में रह सकती है.
कच्चा तेल 10 से 11 फीसदी सस्त
अगर बात कच्चे तेल की कीमतों की करें तो 15 सितंबर के बाद इंटरनेशनल मार्केट में दाम 10 से 11 फीसदी तक नीचे आई हैं. अगर बात पहले ब्रेंट कूड की करें तो 15 सितंबर को दाम 108.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी. जोकि मौजूदा समय में 98.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं. इसका मतलब है कि इस दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है.
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी क्रूड की कीमतों में ब्रेंट से ज्यादा की गिरावट देखी जा चुकी है. आंकड़ों को देखें तो अमेरिकी कच्चे तेल के दाम 15 सितंबर को 100.75 डॉलर प्रति बैरल पर थी, मौजूदा समय में 89.48 डॉलर पर आ चुकी है. इसका मतलब है कि तब से अब तक अमेकिी तेल की कीमतों में 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है.