Fatehabad: रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे अंकित जांगड़ा की मौत, गांव पहुंचा कंकाल बना शव

फतेहाबाद के कुम्हारिया गांव के अंकित जांगड़ा का शव रूस से भारत पहुंचा। स्टडी वीजा पर गए युवक को जबरन रूसी सेना में भर्ती किया गया था। विजय पूनिया अब भी लापता।

फतेहाबाद : रूस की सेना में जबरन भर्ती करके यूक्रेन में युद्ध में धकेले गए फतेहाबाद जिले के गांव कुम्हारिया के 2 युवकों में से एक की मौत हो गई है। युवक अंकित जांगड़ा का शव दिल्ली पहुंचा, जहां से परिजन शव लेकर गांव कुम्हारिया में पहुंचे। गांव में आई डेडबॉडी कंकाल जैसी हो चुकी थी। शनिवार दोपहर बाद गमगीन माहौल में अंकित जांगड़ा का अंतिम संस्कार किया गया।

मृतक अंकित जांगड़ा के बड़े भाई रघुवीर जांगड़ा ने बताया कि परिवार के पास कल शुक्रवार को ही डेडबॉडी भारत भेजने की सूचना पहुंची थी। इसके बाद दिल्ली से डेडबॉडी लेकर आए हैं। डीएनए मैच होने से उसकी अंकित के रूप में पुष्टि हुई। हालांकि, गांव के दूसरे युवक विजय पूनिया का अभी कोई सुराग नहीं लगा है। रघुवीर जांगड़ा ने मांग की है कि भारत सरकार और रूस सरकार उसके छोटे भाई अंकित को शहीद का दर्जा दें। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। हमारे माता-पिता के बारे में सोचते हुए सरकार आर्थिक मदद भी प्रदान करें।

बता दें कि गांव कुम्हारिया के अंकित जांगड़ा (23) और विजय पूनिया (25) स्टडी वीजा पर रूस गए थे। अंकित के भाई रघुवीर ने बताया कि सात महीने पहले अंकित की कॉल आई थी। उसके साथ तब विजय भी था। अंकित ने उधर से कहा, हमें बचा लो। हमारे पास एक-दो दिन ही बचे हैं। इसके बाद हमें युद्ध में भेज दिया जाएगा।

रघुवीर ने बताया कि करीब आठ महीने पहले एक महिला ने अंकित व विजय के साथ अन्य 13 लोगों को रशियन आर्मी में नौकरी दिलाने की लालच दिया था। 15 लोगों का एक बैच बनाया। जॉब दिलाने वाली को वॉट्सऐप पर कॉल की, तो महिला ने कहा कि अंकित और विजय तो मर गए हैं। इसके बाद महिला ने नंबर ब्लॉक कर दिया। इन दोनों युवकों से परिवार के सदस्यों का 11 सितंबर 2025 के बाद से कोई संपर्क नहीं हुआ था।

लगातार दोनों परिवार उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे थे। मगर इसी बीच अंकित की डेडबॉडी भारत भेज दी गई है। वहीं, दूसरे युवक विजय का भी अभी तक कोई पता नहीं चल पा रहा है। बता दें कि, इन दोनों युवकों की वापसी के लिए परिवार की ओर से काफी प्रयास किए गए थे। परिजन दिल्ली और चंडीगढ़ में रूसी एंबेसी, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से मदद की गुहार लगाने के लिए गए। सिरसा सांसद कुमारी सैलजा, रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा, राजस्थान से सांसद हनुमान बैनीवाल ने भी विदेश मंत्री जयशंकर को इस मामले में पत्र लिखा था।

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