महाराष्ट्र: ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी अनिवार्य, क्या टलेगा फैसला?

महाराष्ट्र में 1 मई से ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य! क्या 6 महीने के लिए टलेगा यह फैसला? परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक की अहम बैठक और नए नियमों की पूरी डिटेल।

महाराष्ट्र में अगले महीने 1 मई से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले को 6 महीने के लिए टाल दिया गया है. हालांकि इस खबर के आने के बाद राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने साफ करते हुए कहा कि इस फैसले को 6 महीने के लिए नहीं टाला गया है बल्कि आरटीओ अधिकारियों के साथ कल मंगलवार को होने वाली बैठक में यह फैसला लिया जाएगा कि इस मांग को माना जाए या नहीं.

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि आरटीओ अधिकारियों के साथ कल बैठक होनी है. बैठक में इस संबंध फैसला लिया जाएगा कि इस मांग को स्वीकार किया जाए या नहीं. 6 महीने की अवधि उन्होंने मांगी है, देना है या नहीं, इसको लेकर हम फैसला लेंगे.

‘महाराष्ट्र दिवस’ पर लागू होने के आसार

इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने पिछले दिनों यह ऐलान किया था कि राज्य में सभी लाइसेंसधारी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को 1 मई से मराठी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य होगा. ड्राइवरों की भाषा को पढ़ने और लिखने के साथ-साथ बोलने की क्षमता का भी टेस्ट लिया जाएगा. इस टेस्ट में जो ड्राइवर नाकाम होंगे, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं.

अधिकारियों ने 14 अप्रैल को बताया कि यह नियम ‘महाराष्ट्र दिवस’ के अवसर पर लागू होगा. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने तब कहा था कि ड्राइवरों की जांच के लिए, राज्य भर में मोटर परिवहन विभाग के 59 ऑफिसों के जरिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा. उनके अनुसार, लाइसेंस जारी करने के लिए स्थानीय भाषा का ज्ञान होना पहले से ही एक अनिवार्य शर्त रही है. हालांकि, परिवहन विभाग को खासतौर से मुंबई महानगर क्षेत्र, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर से ऐसी शिकायतें मिली हैं कि कई ड्राइवर यात्रियों के साथ मराठी में बातचीत करने में असमर्थ हैं या ऐसा करने को लेकर इच्छुक नहीं हैं.

लाइसेंस जारी करने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई

राज्य के अधिकारियों ने बताया कि इस टेस्टिंग के जरिए यह जांचा जाएगा कि क्या कोई ड्राइवर मराठी में लिखे किसी साइनबोर्ड या दस्तावेज़ को पढ़ सकता है, एक सामान्य वाक्य लिख सकता है, और उस भाषा में साधारण बातचीत कर सकता है या नहीं. मंत्री सरनाइक ने कहा था कि जिस इलाके में कोई व्यक्ति काम करता है तो स्थानीय भाषा को सीखना उसकी नैतिक ज़िम्मेदारी होती है.

उन्होंने आगे कहा कि भले ही किसी व्यक्ति को अपनी मातृभाषा पर गर्व हो, लेकिन उसे उस राज्य की भाषा का भी सम्मान करना चाहिए और उसे सीखना भी चाहिए, जहां वह अपनी आजीविका कमाता है. सरकार ने अपने फैसले में साफ किया कि जो ड्राइवर इन शर्तों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जा सकते हैं. इसके अलावा, बिना उचित जांच-पड़ताल के लाइसेंस जारी करने वाले परिवहन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.

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