केरलम चुनाव परिणाम: UDF की ऐतिहासिक जीत; मुस्लिम लीग बनी असली धुरंधर
केरलम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन की जबरदस्त जीत। मुस्लिम लीग ने 27 सीटों पर चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड जीत दर्ज की। राहुल गांधी और खरगे पर जनता ने जताया भरोसा।
केरलम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है. उसकी इस जीत में मुस्लिम लीग असली धुरंधर बनकर निकली है. मुस्लिम लीग ने 27 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इसमें कासरगोड से कल्लात्रा माहिन, कोडुवल्ली से पीके फिरोज, थिरुवाम्बाडी से सी. के. कासिम, कोझिकोड साउथ से फैजल बाबू, कुन्नमंगलम से एम. ए. रजाक मास्टर और मन्नारक्कड़ से एन. शमसुद्दीन ने जीत दर्ज कर ली है. 17 सीटों पर बड़े अंतर से बढ़त भी बनाए हुए है. इस तरह उसके खाते में 22 सीटें जाती दिख रही हैं.
| विधानसभा क्षेत्र | उम्मीदवार का नाम |
|---|---|
| कासरगोड | कल्लात्रा माहिन |
| कोडुवल्ली | पी. के. फिरोज |
| थिरुवाम्बाडी | सी. के. कासिम |
| मंजेश्वर | ए. के. एम. अशरफ |
| कुटियाडी | परक्कल अब्दुल्ला |
| पेराम्ब्रा | फातिमा तहलिया |
| कोझिकोड साउथ | फैज़ल बाबू |
| कुन्नामंगलम | एम. ए. रज़ाक मास्टर |
| कोंडोट्टी | टी. पी. अशरफ अली |
| एर्नाड | पी. के. बशीर |
| मंजीरी | एम. रहमतुल्ला |
| पेरिंथलमन्ना | नजीब कांथापुरम |
| मनकाडा | मंजालमकुझी अली |
| मलप्पुरम | पी. के. कुन्हालिकुट्टी |
| वेंगरा | के. एम. शाजी |
| वल्लिकुन्नु | टी. वी. इब्राहिम |
| तिरुरंगडी | पी. एम. ए. समीर |
| तनूर | पी. के. नवास |
| तिरुर | कुरुक्कोली मोइदीन |
| कोट्टक्कल | आबिद हुसैन थंगल |
| मन्नारक्कड | एन. शमसुद्दीन |
| कलामसेरी | वी. ई. अब्दुल गफूर |
हमने एंटी-इनकंबेंसी का लाभ उठाया
गठबंधन की जीत पर कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने कहा, जनता में सरकार के प्रति एंटी-इनकंबेंसी थी. हमने इस एंटी-इनकंबेंसी का लाभ उठाया. राज्य की जनता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी पर भरोसा करती है. एलडीएफ सरकार बहुत भ्रष्ट थी.
हमें जबरदस्त बहुमत मिलेगा
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने, कांग्रेस-UDF केरल में एक सुनिश्चित और ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है. गिनती के कुछ राउंड बाकी हैं. मुझे विश्वास है कि हमें जबरदस्त बहुमत मिलेगा. केरलम के लोगों और हमारे कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मिलकर यह लड़ाई लड़ी और बीजेपी जो राजनीतिक हिसाब-किताब कर रही थी, वह यूडीएफ को सत्ता में आने से रोकने की कोशिश कर रही थी. अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी एलडीएफ की मदद कर रही थी जो नाकाम रही है.