Gita Manishi Swami Gyananand: आधुनिक युग के पथप्रदर्शक हैं स्वामी ज्ञानानंद; NRI रवि चोपड़ा ने बताया प्रेरणास्रोत

स्वामी ज्ञानानंद जी के जन्मदिवस पर चंडीगढ़ में विशेष कार्यक्रम। एनआरआई रवि चोपड़ा ने उन्हें आधुनिक युग का दार्शनिक बताया। जानें गीता और गुरु की महिमा पर स्वामी जी के विचार।

चंडीगढ़  : अमेरिका में रह रहे एनआरआई व प्रमुख व्यवसायी रवि चोपड़ा ने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद केवल एक संत या प्रवचनकर्ता नहीं, बल्कि आधुनिक युग के ऐसे शिक्षाविद, दार्शनिक, लेखक, योगी और मार्गदर्शक हैं जिन्होंने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को देश-विदेश तक पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नैतिकता, जीवन मूल्यों और गीता के सिद्धांतों पर आधारित उनके विचार लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

रवि चोपड़ा ने बताया कि गीता मनीषी श्री ज्ञानानंद जी का जन्म 14 मई 1955 को गुरु नानक देव जी की दिव्य जयंती के पावन अवसर पर हुआ था। बचपन से ही उनमें असाधारण बुद्धिमत्ता, गहन जिज्ञासा और आध्यात्मिकता के प्रति स्वाभाविक झुकाव दिखाई देता था। उन्होंने सांसारिक जीवन के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान को भी समान महत्व दिया और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का प्रयास किया। यही कारण है कि आज वे भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारतीय अध्यात्म और गीता ज्ञान के प्रमुख प्रतिनिधि माने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने प्रवचनों, पुस्तकों और आध्यात्मिक यात्राओं के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया है। उनके विचारों में केवल धार्मिक उपदेश नहीं होते, बल्कि जीवन को व्यावहारिक रूप से बेहतर बनाने की प्रेरणा भी होती है। वे युवाओं को नैतिकता, अनुशासन, सेवा और आत्मविश्वास का संदेश देते हैं तथा परिवारों को संस्कारों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि गुरु परमात्मा से मिलाने का एकमात्र माध्यम है। भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में गुरु की महिमा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु वह शक्ति है जो मनुष्य को अज्ञानरूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के सच्चे ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और मोह-माया में इस प्रकार उलझ गया है कि वह अपने वास्तविक उद्देश्य को भूलता जा रहा है। संसार का आकर्षण व्यक्ति को भगवान से दूर कर देता है, जबकि गुरु ही उसे सही दिशा दिखाकर ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को बदलने वाली चेतना है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन दर्शन है। गीता हमें कर्म, कर्तव्य, संयम, धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संदेश देती है। यदि व्यक्ति गीता के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाए, तो वह कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित रह सकता है। गीता मनुष्य को निराशा से आशा की ओर, भ्रम से सत्य की ओर और तनाव से शांति की ओर ले जाती है।

स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को अध्यात्म और संस्कारों की सबसे अधिक आवश्यकता है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तनाव और स्वार्थ के बीच यदि मनुष्य अपने भीतर शांति चाहता है, तो उसे गीता के संदेशों को समझना और अपनाना होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और गुरु परंपरा से जुड़ें, क्योंकि यही जीवन को स्थिरता और सफलता प्रदान करती है।

रवि चोपड़ा ने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद जी के विचारों का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी उनके प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान है। उनके प्रवचन लोगों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदार बनने तथा आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में मानसिक शांति खोती जा रही है, ऐसे समय में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जैसे संत समाज को संतुलन, संस्कार और आध्यात्मिक जागरूकता का मार्ग दिखा रहे हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.