Karnal Paddy Scam: करनाल में ₹3.54 करोड़ का धान घोटाला; खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के 5 अधिकारी नौकरी से बर्खास्त

करनाल धान घोटाले में बड़ी कार्रवाई! 33,759 बैग धान गायब होने और फर्जी ट्रांसपोर्टेशन मामले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के 5 इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर बर्खास्त।

करनाल: धान खरीद और भंडारण में हुए एक बड़े घोटाले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है. वर्ष 2025-26 के दौरान हुए इस भ्रष्टाचार के मामले में सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पांच अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. जांच में सामने आया है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को ₹3,54,46,936 की भारी चपत लगी है.

जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे: ​ये पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब गांव दादुपुर रोडान निवासी देविन्द्र कुमार की शिकायत पर उपायुक्त ने एसडीएम के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की. ​स्टॉक में भारी सेंध पाई गई. मैसर्ज बटान फुड्स (सलारु) की फिजिकल जांच के दौरान 33,759 बैग (लगभग 12,500 क्विंटल) धान गायब मिला. घोटाले का सबसे हैरान करने वाला पहलू फर्जी परिवहन रहा. रिकॉर्ड में धान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना दिखाया गया, लेकिन 10 से अधिक ट्रकों की दूरी शून्य किलोमीटर दर्ज की गई. इसका सीधा अर्थ था कि धान मंडियों से बाहर निकला ही नहीं और कागजों में उसकी ढुलाई दिखाकर पैसे हड़प लिए गए.​

इन अधिकारियों पर गिरी गाज: हेडक्वार्टर ​विभागीय कार्रवाई के तहत जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है, उन पर गंभीर आरोप तय किए गए हैं.

  • ​समीर वशिष्ठ (तत्कालीन इंस्पेक्टर): निगरानी में भारी लापरवाही और बिना अनुमति के प्राइवेट प्लिंथ में धान रखवाने के दोषी.​
  • संदीप शर्मा (इंस्पेक्टर): जुण्डला मंडी में 24 ट्रकों के फर्जी मूवमेंट और रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप.​
  • यशवीर सिंह (तत्कालीन इंस्पेक्टर): घरौंडा मंडी में स्टॉक की कमी और ट्रांसपोर्टेशन में अनियमितता.​
  • रामफल (सब-इंस्पेक्टर): तरावड़ी की राइस मिल से 855 मीट्रिक टन धान गायब होने और बिना अनुमति स्टॉक शिफ्ट करने के मामले में लिप्त.
  • लोकेश (इंस्पेक्टर): निसिंग मंडी में स्टॉक की कमी और फर्जी ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड दर्ज करने के आरोपी.

मुकदमे दर्ज कर जांच जारी: ​अक्टूबर 2025 में इन सभी अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. हालांकि बर्खास्त अधिकारियों ने फरवरी 2026 में अपने जवाबों में खुद को निर्दोष बताते हुए विभागीय नियमों के तहत काम करने का दावा किया था, लेकिन जांच समिति ने उनके तर्कों को खारिज कर दिया. जिसके चलते अब उनको बर्खास्त दिया गया है.

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