Kolar: कोलार में ‘डेथ ट्रैप’ बने कृषि गड्ढे, 15 दिन में 7 मौतें; DC का सख्त आदेश
कर्नाटक के कोलार में कृषि गड्ढों में डूबने से 2 हफ्ते में 7 लोगों की मौत। जिला आयुक्त एम.आर. रवि ने 7 दिन में फेंसिंग करने या गड्ढे बंद करने के दिए सख्त निर्देश।
कर्नाटक के कोलार जिले में इन दिनों डूबने से मरने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है. पिछले दो हफ्तों में कृषि के खोदे गए गड्ढे में डूबने से सात लोगों की जान जा चुकी है. बढ़ती मौतों से इलाके में दहशत का माहौल है. जिला आयुक्त ने जिम्मेदार लोगों का सख्त चेतावनी दी है कि वह इन गड्ढों के चारों ओर फेंसिंग करा लें, नहीं तो उन पर सख्त कार्रवाई हो सकती है. मृतकों के परिजन हादसों को लेकर काफी परेशान है.
अब तक 7 लोगों की मौत
रविवार को मालूर तालुका के नक्कनाहल्ली में एक कृषि गड्ढे में गिरने से श्रीनिवास (40) और उनके बेटों चेतन (13) और राजेश (8) की मौत हो गई. इस घटना के बाद जिला प्रशासन को सूचित कर दिया गया है. हाल के दिनों में कोलार जिले में कृषि गड्ढे में गिरने और मरने की घटनाएं बढ़ रही हैं. 5 मई को बंगारपेट तालुका के बोडेनहल्ली गांव में एक गड्ढे में गिरने से तनुश्री (15) और कार्तिक (8) नाम के भाई-बहन की मौत हो गई.
जानें क्यों हो रही मौतें
इसके कुछ ही समय बाद, 8 मई को श्रीनिवासपुरा तालुका के पचरामकालाहल्ली गांव में नहाने गए नरेंद्र (25) और चंदन (25) नाम के दो युवकों की भी मौत हो गई. रविवार को मालूर में एक पिता और दो बच्चों की मौत से जिले के लोग सदमे में हैं. ये दुर्घटनाएं किसानों द्वारा अपनी जमीनों पर बनाए गए कृषि गड्ढों की उचित सुरक्षा न करने के कारण हो रही हैं, और जिला प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई कर रहा है. बता दें कि कोलार जिला एक चिरस्थायी सूखाग्रस्त क्षेत्र है, जहां बारहमासी नदियां नहीं हैं. इसलिए यहां के किसान फसलों की सिंचाई के लिए के लिए खेतों में पानी के लिए गड्ढे खोदते हैं.