रविवार व्रत नियम और लाभ: 12 या 30, कितने रविवार रखें सूर्य देव के व्रत?

सूर्य देव की कृपा के लिए रविवार का व्रत कैसे रखें? जानें 12 या 30 व्रत का संकल्प, पूजा विधि, नियम और इस व्रत से होने वाले स्वास्थ्य एवं करियर संबंधी लाभ।

हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित किया गया है. रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित किया गया है. रविवार को विधि-विधान से भगवान सूर्य का पूजन किया जाता है. उनको अर्घ्य चढ़ाया जाता है. इस दिन पूजन के साथ-साथ सूर्य देव का व्रत भी किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि रविवार को व्रत और पूजन करने पर सूर्य देव प्रसन्न होकर आरोग्यता और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. बहुत से लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि 12 या 30 सूर्य देव के कितने व्रत रखने चाहिए? आइए जानते हैं.

हिंदू धर्म शास्त्रों और पुराणों में सूर्य देव की पूजा और व्रत के नियम बताए गए हैं. नियम के अनुसार, सूर्य देव का व्रत 12 और 30 रविवारों तक किया जा सकता है. आप चाहें तो 12 रविवार के व्रत का संकल्प भी ले सकते हैं और 30 व्रत कe भी. इसके अलावा आप एक वर्ष तक पड़ने वाले सभी रविवार पर भी सूर्य देव के व्रत को करने का संकल्प ले सकते हैं.

रविवार व्रत के नियम

रविवार को सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्य देव की पूजा का संकल्प लें. सूर्योदय के समय सूर्य को जल यानि अर्घ्य चढ़ाएं. जल में लाल चंदन, लाल फूल और तिल मिलाएं. भगवान सूर्य के मंत्रों का जाप करें. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. पूरे दिन उपवास रखें. इस दौरान बिना नमक का सात्विक भोजन किया जा सकता है. तामसिक भोजन प्याज, लहसुन, मांस, शराब का सेवन न करें.

दिनभर सत्य बोलें, क्रोध से बचें और मन को शुद्ध रखें. ब्रह्मचर्य का पालन करें. सूर्य से संबंधित वस्तुएं जैसे तांबा, गेहूं, लाल वस्त्र या गुड़ दान में दें. सूर्यास्त के समय भी सूर्य को प्रणाम करें और दीप जलाएं. सोमवार को सूर्योदय पर अर्घ्य चढ़ाकर व्रत का पारण करें.

रविवार के व्रत का महत्व

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार का व्रत करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. स्वास्थ्य, यश और आत्मविश्वास बढ़ता है. रोग, दोष मिटते हैं. भाग्य और धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है. संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ माना गया है. रविवार के दिन व्रत करने से कुंडली में सूर्य देव की स्थिति शुभ और मजबूत होती है.

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