उन्नाव DM का ‘नायक’ अवतार: मीटिंग से ही गबन के आरोपी अधिकारी को भेजा जेल

उन्नाव के डीएम घनश्याम मीना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए 11 लाख के गबन के आरोपी बीएमएम को मीटिंग के बीच से गिरफ्तार कराया। जानें क्या है पूरा मामला।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से प्रशासनिक कड़ाई का एक ऐसा अनूठा मामला सामने आया है, जिसने अनिल कपूर अभिनीत प्रसिद्ध फिल्म नायक की यादें ताजा कर दी हैं. फिल्म की ही तरह, सोमवार को विकास भवन में चल रही एक अहम सरकारी बैठक के दौरान उन्नाव के जिलाधिकारी (DM) घनश्याम मीना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ऑन द स्पॉट एक्शन लिया. डीएम ने मीटिंग के बीच में ही पुलिस को बुलाकर 11 लाख के सरकारी धन के गबन के आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार करवाकर जेल भिजवा दिया. इस औचक और कड़े कदम से जिले के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं आम जनता के बीच डीएम के इस तेवर की जमकर चर्चा हो रही है.

जानकारी के अनुसार, सोमवार को विकास भवन सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जिला स्तरीय क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक चल रही थी. डीएम घनश्याम मीना खुद इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे और लखपति दीदी योजना, समूह गठन व ट्रांजैक्शन जैसे प्रमुख बिंदुओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे. इसी दौरान डीएम को पता चला कि पुरवा ब्लॉक के ब्लॉक मिशन मैनेजर (BMM) दीपराज भी इस बैठक में मजे से मौजूद हैं, जिन पर पुरवा कोतवाली में 11 लाख के सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज है. FIR दर्ज होने के बावजूद आरोपी के खुलेआम घूमने और ड्यूटी करने पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई.

डीएम ने एसपी को किया फोन, तुरंत बुलाई पुलिस

डीएम घनश्याम मीना ने बिना वक्त गंवाए बैठक के बीच से ही पुलिस अधीक्षक (SP) जेपी सिंह को फोन लगाया और तत्काल पुलिस बल भेजने को कहा. एसपी के निर्देश पर पुरवा कोतवाली पुलिस तुरंत विकास भवन सभागार पहुंची। डीएम के आदेश पर पुलिस ने बैठक में मौजूद बीएमएम दीपराज को सबके सामने हिरासत में ले लिया और अपने साथ गिरफ्तार कर ले गई. इसके साथ ही, डीएम ने संबंधित खंड विकास अधिकारी (BDO) पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इस गबन में शामिल अन्य सभी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए.

फर्जी समूह बनाकर किया था बड़ा घोटाला

सूचना विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत मिली थी कि फर्जी समूह गठित कर सरकारी पैसे को ठिकाने लगाया जा रहा है. इस पर डीएम ने एक विशेष जांच समिति बनाई थी. समिति ने जब बैंक स्टेटमेंट, जमीनी हकीकत और दस्तावेजों को खंगाला, तो बीएमएम दीपराज को सरकारी धन के गबन का मुख्य दोषी पाया. जांच रिपोर्ट के आधार पर ही पहले मुकदमा दर्ज कराया गया था.

पिछले 4 साल के भुगतानों की होगी जांच

आजीविका मिशन के कार्यों में ढिलाई और लापरवाही को लेकर डीएम ने भारी असंतोष जताया. उन्होंने आदेश दिया है कि पिछले 4 वर्षों में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत किए गए सभी भुगतानों की एक विशेष कमेटी गठित कर गहन जांच की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि सरकारी पैसा कहाँ और किसे गया है.

इसके अलावा, जिलाधिकारी के निरीक्षण में असोहा विकासखंड के एक कंप्यूटर ऑपरेटर के आपत्तिजनक स्थिति में पाए जाने के बावजूद अब तक FIR दर्ज न होने पर डीएम ने नाराजगी जताई और तत्काल मुकदमा दर्ज करने का हुक्म दिया। साथ ही, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में खराब प्रगति को लेकर पुरवा के बीएमएम का वेतन रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं. डीएम ने साफ कर दिया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे.

Leave A Reply

Your email address will not be published.