Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, रूठ जाएंगे काल भैरव

Adhikmas Kalashtami 2026: 8 जून को है 3 साल में एक बार आने वाली अधिकमास की कालाष्टमी। जानें भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने के नियम और इस दिन क्या न करें।

सनातन धर्म में हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कालाष्टमी मनाई जाती है. इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान काल भैरव की पूजा और व्रत किया जाता है. भगवान काल भैरव महादेव अंशावतार हैं. उनका रूप रौद्र है. मान्यता है कि भैरव देव की पूजा जीवन की नकारात्मता दूर कर देती है. साथ ही शनि और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से भी छुटकारा दिलाती है.

इन दिनों अधिकमास चल रहा है. इस मास में पड़ने वाली कालाष्टमी तीन साल में एक बार आती है, इसलिए इसका महत्व अधिक है. इस साल ज्येष्ठ मास की कालाष्टमी 08 जून को मनाई जाने वाली है. इस दिन काल भैरव का पूजन और व्रत किया जाएगा. कालाष्टमी के दिन जहां काल भैरव की पूजा और व्रत श्रेष्ठ है, वहीं इस दिन कुछ कामों को करना धर्म शास्त्रों में अनुचित माना गया है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

कालाष्टमी के दिन न करें ये गलतियां

कुत्ते को जूते-चप्पल न मारें: कालाष्टमी के दिन कुत्ते को जूता-चप्पल नहीं दिखाएं या मारें. साथ ही उसे किसी प्रकार की चोट भी न पहुंचाएं. सनातन धर्म में कुत्ता काल भैरव का प्रतीक माना जाता है.

जूठा भोजन ना खिलाएं: कालाष्टमी के दिन गलती से भी कुत्ते को जूठा भोजन ना खिलाएं. ऐसा करने वालों को कालभैरव के अपमान का दोष लगता है. इस दिन काले कुत्ते को मुलायम रोटी, गुड़ या मीठे बिस्कुट दें.

नमक न खाएं: कालाष्टमी के दिन अगर व्रत रखते हैं, तो भूलकर भी नमक न खाएं. ऐसा करने से व्रत भंग हो जाता है, जिसके अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं.

मांसाहार और शराब का सेवन न करें: कालाष्टमी के दिन व्रत न रखने वालों के लिए भी मांसाहार और शराब का सेवन वर्जित है. ऐसा करने पर परिणाम नुकसानदेह होता है.

अनैतिक कार्य न करें: कालाष्टमी से दिन किसी प्रकार के अनैतिक कार्य से दूर रहें. शास्त्रों में कालभैरव को ‘दंडपाणि’ माना गया है. इस दिन गलत काम करने वालों को काल भैरव कठोर दंड देते हैंं.

कालाष्टमी पर करें ये काम

कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते के दूध पिलाएं या दूध रोटी खिलाएं. काल भैरव मंदिर में उनके निमित्त सरसों के तेल का दीया जलाएं. छोटे लड़कों को उनका पसंदीदा चीज दें. काल भैरव मंदिर में उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल दान करें. मान्यता है कि इन कामों को करने काल भैरव देव प्रसन्न होते हैं और जीवन के संकट दूर करते हैं.

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