दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का निधन, भारतीय खेल जगत में शोक की लहर

भारतीय शूटिंग के दिग्गज जसपाल राणा का निधन। जर्मनी से लौटने के बाद दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस। शूटिंग जगत को अपूरणीय क्षति,

भारत के सबसे बेहतरीन पिस्टल शूटर और दिग्गज कोच जसपाल राणा का निधन हो गया. अक्सर हंसते-खेलते, अपने खिलाड़ियों और अपने हक के लिए पूरे जोश-जुनून से लड़ने वाले जसपाल राणा जिंदगी की जंग हार गए. ये सब इतनी अचानक हुआ, जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी. विदेशी जमीन पर बिगड़ी तबीयत, दिल्ली में इलाज होने और फिर अचानक उनका दुनिया छोड़कर चले जाना हर भारतीय को जोर का झटका और दुख दे गया. दुख इसलिए भी क्योंकि एक वक्त पर वो बिल्कुल ठीक होते नजर आ रहे थे लेकिन अचानक सब बदल गया.

जर्मनी में बिगड़ गई थी तबीयत

जसपाल राणा शूटिंग टीम के साथ जर्मनी में थे जहां म्यूनिख में वर्ल्ड कप चल रहा था. तब उन्होंने बताया था कि कुछ दिन से दर्द महसूस हो रहा था, जिसे वो सामान्य गैस से जुड़ी परेशानी समझ रहे थे. जब 31 मई को उनसे पूछा कि वो कब लौट रहे हैं, तो उन्होंने 1 जून की तड़के सुबह करीब 2 बजे मैसेज किया… ‘Landed in Delhi (दिल्ली पहुंच गया हूं)’. फिर कुछ ही घंटों बाद सुबह पता चला कि उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें साकेत के Max सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एडमिट कराया गया.

सर्जरी हुई, सुधार हुआ, फिर अचानक…

इसके बाद से ही वो अस्पताल में एडमिट थे, जहां उनकी सर्जरी भी हुई. इस दौरान उन्हें एक स्टेंट लगाया गया, जो सफल रहा. जल्द ही दूसरा स्टेंट भी डाला जाना था. राणा के पिता और उत्तराखंड सरकार में पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा ने बताया था कि बीच में तबीयत में सुधार हुआ लेकिन तब डॉक्टर उनसे मिलने नहीं दे रहे थे. उनकी बेटी श्रेयांशी राणा ने भी बताया था कि पिताजी की तबीयत ठीक हो रही है. मगर गुरुवार देर रात ये सारी उम्मीदें धूमिल पड़ गईं, जब जसपाल ने अंतिम सांस लेते हुए इस दुनिया से विदा ली.

भारतीय शूटिंग के लिए सबसे बड़ी क्षति

जसपाल राणा का निधन असामयिक है और उनकी जगह भरपाना वाकई में बहुत मुश्किल है. ये सिर्फ कहने की बात नहीं है बल्कि उन्होंने खुद अपने लंबे शूटिंग और कोचिंग करियर में कई बार साबित किया. कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा 15 मेडल जीतने का भारतीय रिकॉर्ड हो या फिर उनकी कोचिंग में मनु भाकर का एक ही ओलंपिक में 2 मेडल जीतने का रिकॉर्ड, जसपाल राणा ने शूटिंग रेंज को अपना सब कुछ दिया और हर मोर्चे पर उनका निशाना सटीक ही बैठा.

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