दिल्ली EV पॉलिसी: सब्सिडी का उठाएं लाभ, जानें नए नियम और छूट का गणित
दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी: इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर पाएं भारी सब्सिडी। जानें दोपहिया और ऑटो पर मिलने वाली छूट और स्क्रैपिंग इंसेंटिव के नियम।
दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पॉलिसी का लाभ लेने के लिए वाहन खरीदारों को कुछ खास नियमों और शर्तों का ध्यान रखना होगा। यदि आप भी ईवी पर सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी का फायदा लेना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि इसी साल गाड़ी खरीद लें। क्योंकि सब्सिडी तीन साल तक मिलेगी पर यह हर साल घटती जाएगी। ईवी बाइक पर पहले साल अधिकतम 30 हजार की मदद राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी, जबकि अगले साल 20 और अंतिम साल यह सब्सिडी घटकर 10 हजार ही रह जाएगी। इसका मतलब है कि जो जल्दी खरीदेंगे उन्हें यह ज्यादा सस्ती मिलेगी।
स्क्रैपिंग पर 10 हजार, लेकिन एक शर्त
नई पॉलिसी के तहत जो लोग नोटिफिकेशन जारी होने के पहले साल के भीतर वाहन खरीदेंगे, उन्हें सबसे ज्यादा सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इसके बाद अगले तीन वर्षों में यह लाभ लगातार घटता जाएगा। इसके साथ ही, पुराने वाहन को स्क्रैप कराने वाले लोगों को स्क्रैपिंग इंसेंटिव का फायदा तभी मिलेगा, जब वे स्क्रैपिंग के छह महीने के भीतर ही नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीद लेंगे। पेट्रोल वाले बाइक की स्क्रैपिंग करके नया ईवी लेने पर सरकार 10 हजार रुपये इंसेंटिव देगी।
डीलर्स को निर्देश, वेबसाइट पर पॉलिसी अपलोड करें
सरकार ने वाहन डीलर्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे खरीदारों को पहले ही स्पष्ट रूप से बताएं कि उनके चुने हुए मॉडल पर ईवी पॉलिसी के तहत सब्सिडी मिलेगी या नहीं। आम जनता की सुविधा के लिए परिवहन विभाग ने इस नई पॉलिसी के नियमों और शर्तों का पूरा ब्योरा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है।
दोपहिया वाहन
जिन ई स्कूटर या बाइक की एक्स शोरूम कीमत 2.25 लाख रुपये से अधिक होगी उन पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।
इलेक्ट्रिक ऑटो
चार किलोवाट से कम का इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।
श्रेणीवार समझिए छूट का गणित
इलेक्ट्रिक ऑटो (सब्सिडी)
पहले वर्ष में ₹50,000
दूसरे वर्ष में ₹40,000
तीसरे वर्ष में ₹30,000
दोपहिया वाहन (प्रति किलोवाट)
पहला वर्ष ₹10,000 (अधिकतम ₹30,000)
दूसरा वर्ष ₹6,600 (अधिकतम ₹20,000)
तीसरा वर्ष ₹3,300 (अधिकतम ₹10,000)
मालवाहक वाहनों पर कितनी सब्सिडी
पहला वर्ष 1.75 टन तक के कुल भार वाले वाहन पर ₹50,000 और इससे भारी वाहन पर ₹1,00,000
दूसरा वर्ष 1.75 टन तक के कुल भार वाले वाहन पर ₹37,500 और इससे भारी वाहन पर ₹75,000
तीसरा वर्ष 1.75 टन तक के कुल भार वाले वाहन पर ₹25,000 और इससे भारी वाहन पर ₹50,000