दिल्ली दवा घोटाला: 650 करोड़ का खेल, चादरों की खरीद में बड़ा खुलासा
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के 650 करोड़ के घोटाले में एसीबी का बड़ा खुलासा। चादरों की खरीद में तिगुना दाम और 400 करोड़ की दवाओं में 300 करोड़ की रिश्वत का आरोप।
दिल्ली में स्वास्थ्य उपकरण एवं दवा खरीद के नाम पर हुए कथित 650 करोड़ के घोटाले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) की जांच में सामने आया है कि चादरों की खरीद एक ही परिवार की तीन फर्मों से की गई। इसमें भी चादर का तीन गुना अधिक दाम लगाया गया था।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की मिलीभगत से 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच जारी है। तफ्तीश में सामने आया कि एम्स को 150 सौ रुपये में दी जाने वाली चादरें दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए 450 रुपये प्रति चादर की दर से खरीदी गईं। इसके लिए 75 करोड़ रुपये खर्च किए गए। तीन फर्मों से यह खरीदारी की गई थी और यह तीनों एक ही परिवार से जुड़ी थीं। यहीं नहीं एक ही दिन में टेंडर, खरीदारी स्वीकृति और चादरों की आपूर्ति कर दी गई। फिर मिलने के अगले दिन 75 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जिसमें 25 करोड़ चादर की कीमत थी, वहीं 50 करोड़ रुपये घोटाले में आरोपी और सामान आपूर्ति करने वाला राजीव रंगीला और अधिकारियों में बंट गए।
चार सौ करोड़ की दवा में तीन सौ करोड़ घूस
जांच में सामने आया है कि सीपीए ने दवाओं की खरीद का कोई टेंडर जारी नहीं किया। वहीं, दवाओं की आपात जरूरत दिखाकर अपने स्तर से करीब 400 करोड़ रुपये की दवाएं खरीद ली गईं। जांच में सामने आया है कि राजीव कुमार रंगीला ने इसमें से 300 करोड़ रुपये घूस के तौर पर बांटे। रंगीला फिलहाल फरार है। बीते दिनों एसीबी ने उसके घर पर भी छापा मारा था, लेकिन वह नहीं मिला।
कई फर्मों का टर्नओवर भी फर्जी दिखाया गया
जांच में खुलासा हुआ है कि टेंडर की शर्तों के अनुरूप प्रक्रिया में भाग लेने वाली कोई भी फर्म या कंपनी नहीं थी। सामान आपूर्ति करने वाली कई फर्मों का टर्नओवर भी फर्जी दिखाया गया था। इसके अलावा फर्जी फर्मों का इस्तेमाल टेंडर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए भी किया गया था। एसीबी के निशाने पर टेंडर में भाग लेने वाली फर्में भी हैं।
15 दिन चली जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर
स्वास्थ्य उपकरण एवं दवा खरीद घोटाले को लेकर एफआईआर दर्ज करने से पहले दिल्ली सरकार ने लगभग दो सप्ताह तक इसकी जांच अपने स्तर पर करवाई थी। प्राथमिक जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद ही सीपीए पर विजिलेंस ने छापा मारा और उसके बाद एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया।
आप का मानव चेन बनाकर मौन प्रदर्शन
आप ने कथित दवा घोटाले के विरोध में सोमवार को एलएनजेपी अस्पताल के बाहर मौन सांकेतिक प्रदर्शन किया। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में हुए कार्यकर्ताओं ने लंबी मानव शृंखला बनाई।
‘आप की सरकार में डॉ. वत्सला प्रमुख रहीं’
दिल्ली भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान डॉ. वत्सला तीन अस्पतालों और एक चिकित्सा निकाय की प्रमुख रहीं। यह दर्शाता है कि तत्कालीन अरविंद केजरीवाल और आतिशी सरकारों से उनकी नजदीकी रही है।