E-20 पेट्रोल में मिलावट का दावा: क्या आपकी गाड़ी के लिए सुरक्षित है ईंधन?
वाहन निर्माता कंपनियां E-20 पेट्रोल में मिलावट की बात कर रही हैं, तो उपभोक्ता क्या करें? जानें पेट्रोल की शुद्धता जांचने के तरीके और सरकार के नियमों की हकीकत।
वाहन निर्माता कंपनियां E-20 पेट्रोल पर सवाल खड़े होने पर ईंधन में मिलावट से नए वाहन के खराब होने का हवाला दे रही हैं. मसला ये है कि E-20 में अगर कोई मिलावट हो रही है तो कहां हो रही है? इसका जवाब उपभोक्ता को नहीं मिल रहा है, क्योंकि पेट्रोल पंपों में मिलावट की तेल कंपनियां डिजिटल तकनीक से रियल टाइम निगरानी करती हैं. इसके चलते पेट्रोल में मिलावट या धांधली (जैसे केरोसिन या सॉल्वेंट्स) पर कोई अलग से सालाना रिपोर्ट भी जारी नहीं की जाती.
इस मामले पर उपभोक्ता मामलों के जानकारों का कहना है कि वाहन निर्माता और सरकार अगर E-20 को हरी झंडी दे रहे हैं और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में मिलावट का दावा कर रहे हैं तो पेट्रोल पंप से इतर तो कोई जगह बचती नहीं. जहां मिलावट की जा सके. इसके बाद तो यही कहना शेष होगा कि उपभोक्ता खुद E-20 में मिलावट कर अपने वाहन खराब कर रहे हैं.
क्या कहते हैं जानकार
सुप्रीम कोर्ट में उपभोक्ता मामलों के वकील सत्यम सिंह के मुताबिक कुछ साल पहले तक एक सालाना रिपोर्ट पेट्रोल पंप में मिलावट, सेवाओं में कमी समेत अन्य पहलुओं पर जारी होती थी. वह बंद हो चुकी है और अब तेल कंपनियों द्वारा रियल टाइम निगरानी, तेल टैंकरों की जीपीएस ट्रैकिंग, ऑनलाइन ऑटोमेशन और औचक निरीक्षण किए जाते हैं. ऐसे में मिलावट नहीं होने का दावा तेल कंपनियों द्वारा किया जाता है. जबकि E-20 पर वाहन निर्माता की सफाई सामने आई है कि ईंधन मिलावटी होने पर कंपनी जिम्मेदार नहीं होगी. सिंह के मुताबिक ऐसे में उपभोक्ता कहां जाएगा, क्योंकि सरकार तो साफ कह रही है कि E-20 से वाहन के इंजन या उपकरणों पर कोई फर्क नहीं पड़ता. जबकि एआरएआई की अप्रकाशित रिपोर्ट में यह साफ है कि अगर वाहन E-20 कंपेटेबल नहीं है तो कुछ प्लास्टिक और रबर के पुर्जे प्रभावित होंगे.
सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए
प्रोफेसर बेजॉन मिश्रा ने कहा कि मौजूदा समय उपभोक्ता की स्थिति बड़ी विकट है. सरकार को तत्काल इस पर कदम उठाना चाहिए, हकीकत सामने लायी जानी चाहिए. E-20 में मिलावट अगर हो रही है तो यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है. तेल कंपनियों को इस पर अपना पक्ष तभी स्पष्ट करना चाहिए था, जब वाहन निर्माता कंपनी ने E-20 पेट्रोल में मिलावट का दावा किया था. उन्होंने कहा कि उपभोक्ता आखिर कहां जाए, क्या हर बार पेट्रोल पंप पर जाकर पहले ये जांच करे कि ईंधन में मिलावट तो नहीं है. हरेक मामले के लिए उपभोक्ता फोरम या अदालत का दरवाजा उपभोक्ता खटखटाए तो फिर तेल कंपनियों, वाहन निर्माता कंपनियों को उपभोक्ता निवारण प्राधिकार बंद कर देने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के वकील अनुपम मिश्रा के मुताबिक यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है. सरकार को तत्काल कदम उठाकर हरेक भ्रम को दूर करना चाहिए और जहां पर भी कमियां हैं. उसे दूर करने के लिए कदम उठाना चाहिए.
कैसे होती है पेट्रोल पंपों की निगरानी
- GPS ट्रैकिंग: तेल ले जाने वाले टैंकरों में GPS लगाया गया है ताकि रास्ते में कोई चोरी या मिलावट न हो सके.
- ऑटोमेशन: पेट्रोल पंपों के टैंकों को ऑनलाइन ऑटोमेशन से जोड़ा गया है, जिससे तेल की मात्रा और स्टॉक में किसी भी गड़बड़ी की तुरंत जानकारी मिल जाती है.
- अचानक निरीक्षण: क्वालिटी एश्योरेंस सेल (QAC) और मोबाइल लैब द्वारा देश भर में पेट्रोल पंपों से रैंडम सैंपल लेकर जांच की जाती है.
- ईंधन की सघनता- ईंधन की सघनता को भी पेट्रोल पंप पर दर्शाया जाता है.
ग्राहकों के पास जांच के अधिकार-यदि आपको किसी पेट्रोल पंप पर मिलावट (या पानी मिले होने) का संदेह होता है, तो आप मौके पर ही इन अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं:
- फिल्टर पेपर टेस्ट: आप पेट्रोल पंप पर मुफ्त में उपलब्ध फिल्टर पेपर मांगकर पेट्रोल की शुद्धता तुरंत जांच सकते हैं.
- डेंसिटी (घनत्व) टेस्ट: हर पंप पर उपलब्ध हाइड्रोमीटर और थर्मामीटर से पेट्रोल के आधिकारिक घनत्व की जांच की जा सकती है
- गड़बड़ी पाए जाने पर राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग या संबंधित तेल कंपनी के पोर्टल पर शिकायत करने पर पंप को सील कर जांच की जाती है.