ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का विजन: 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह
ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने भारत के ऊर्जा विजन 2047 को साझा किया। बैटरी निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय ग्रिड कनेक्टिविटी पर दिया विशेष जोर।
चंडीगढ़ : केंद्रीय विद्युत एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत तथा 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से विस्तार के कारण देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
नई दिल्ली के यशोभूमि (आईआईसीसी), द्वारका में आयोजित 12वें इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (IESW-2026) के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में “एनर्जी स्टोरेज विजन फॉर इंडिया-2047” विषय पर संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगले वर्ष देश में बिजली की पीक डिमांड 300 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि मई 2026 में यह मांग पहले ही 271 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है, जबकि वर्तमान उपलब्ध उत्पादन क्षमता लगभग 284 गीगावाट है। उन्होंने कहा कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण के मजबूत तंत्र का निर्माण भी अनिवार्य है।
सौर ऊर्जा की सफलता के बाद अब ऊर्जा भंडारण पर फोकस
मनोहर लाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 50 गुना बढ़कर 137 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। हालांकि, सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का पूरा लाभ तभी मिल सकता है जब बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए अब ऊर्जा भंडारण में निवेश राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है।
‘देश से बड़ा कुछ नहीं’, स्वदेशी विनिर्माण पर दिया जोर
केंद्रीय मंत्री ने बैटरी निर्माण और ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी तकनीक और घरेलू विनिर्माण पर विशेष बल देना होगा। उन्होंने कहा, “देश से बड़ा कुछ नहीं है। भले ही शुरुआत में स्वदेशी उत्पाद थोड़े महंगे लगें, लेकिन वे भारत के अपने हैं।” उन्होंने कहा कि देश में ही बैटरी और अन्य उपकरणों का निर्माण होने से आयात पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में उत्पादन लागत भी घटेगी।
भारत-यूएई के बीच 40 हजार करोड़ रुपये की अंडरसी पावर केबल की योजना
मनोहर लाल ने भारत की वैश्विक ऊर्जा रणनीति का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी समुद्र के नीचे बिजली ट्रांसमिशन केबल बिछाने की महत्वाकांक्षी योजना पर विचार किया जा रहा है। लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट भारत के “वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड” विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिजली के आदान-प्रदान को नई दिशा मिलेगी।
श्रीलंका, सिंगापुर और यूरोप तक बिजली व्यापार का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि भारत केवल यूएई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रीलंका और सिंगापुर के साथ भी पावर कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य पूर्व से पश्चिम तक एक ऐसा वैश्विक विद्युत ग्रिड विकसित करना है, जिसके माध्यम से भविष्य में यूरोप के साथ भी बिजली का व्यापार संभव हो सके।
उद्योगों को अनुसंधान और नवाचार के लिए मिलेगा पूरा सहयोग
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ऊर्जा भंडारण, बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से भी मुलाकात की। उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), नई तकनीकों के विकास तथा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार हर आवश्यक नीतिगत और नियामकीय सहयोग उपलब्ध कराएगी।
तीन दिवसीय आयोजन में 15 देशों के विशेषज्ञ हुए शामिल
8 से 10 जुलाई 2026 तक आयोजित इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक-2026 में 15 से अधिक देशों के स्वच्छ ऊर्जा विशेषज्ञ, सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रमुख नेता और 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट ग्रिड, बैटरी रीसाइक्लिंग, हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से संबंधित महत्वपूर्ण रिपोर्टें जारी की गईं। साथ ही, विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश और द्विपक्षीय व्यापार की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
ऊर्जा सुरक्षा से विकसित भारत तक का रोडमैप
मनोहर लाल ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा नीति केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी विनिर्माण, अत्याधुनिक तकनीक, वैश्विक ऊर्जा कनेक्टिविटी और हरित विकास को साथ लेकर आगे बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे निवेश के बल पर भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा।