NEET UG 2026 Results: चंडीगढ़ के टॉपर्स ने शेयर किए सफलता के मंत्र

NEET UG 2026 के नतीजे घोषित। चंडीगढ़ के टॉपर्स माधवन, हर्शुल, आशी और समर्थ ने बताया कैसे 10 घंटे की पढ़ाई और सही प्लानिंग से हासिल की ऑल इंडिया रैंक।

पंचकूला: राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) यूजी-2026 का नतीजा गुरुवार की रात घोषित किया गया. भले ही नीट की परीक्षा एक बार लीक होने के बाद दोबारा ली गई हो, लेकिन छात्रों के सार्थक प्रयास कम नहीं हुए. नतीजतन परीक्षा में सफल रहने वाले छात्र देश भर से सामने आए. चंडीगढ़ से भी कई छात्र टॉप-100 में शामिल रहे. कोचिंग सेंटर ऐलेन में तैयारी कर सफल होने वाले ऐसे ही कुछ छात्रों से ईटीवी भारत ने बातचीत कर उनके प्रयासों के बारे में जाना. सभी टॉपर्स ने पढ़ाई को लेकर अपने-अपने तौर-तरीकों को सांझा किया और बताया कि किस तरह उन्होंने अपनी फैकल्टी-डाउट क्लियरेंस और सेल्फ स्टडी को मैनेज किया.

तैयारी से पहले सब्जेक्ट क्लियर रखें: कोचिंग सेंटर ऐलेन के स्टूडेंट माधवन महाजन ने चंडीगढ़ से टॉप कर ऑल इंडिया रैंक (एआईआर-44) हासिल किया है. उन्होंने ईटीवी भारत से अपना अनुभव सांझा करते हुए कहा कि “रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करनी है, इससे जरूरी प्लानिंग को सही से एग्जीक्यूट करना होना चाहिए. स्टूडेंट को ये स्पष्ट होना चाहिए कि करना क्या है, ताकि उसके अनुसार ही आगे बढ़ा जा सके. अपनी योजना को या तो लिख लिया जाए या फिर प्लानिंग को याद रखा जाए. ये सिलसिला लगातार जारी रहना चाहिए.” माधवन महाजन ने कहा कि उनके लिए सबसे अधिक मुश्किल सब्जेक्ट बायो का रहा, लेकिन विषय के डाउट फैकल्टी (टीचरों) की मदद से दूर किए जाते रहे. इसके अलावा प्रश्नों की प्रेक्टिस जितनी अधिक होगी, उतना क्लियर होता जाता है. प्रश्न देखकर ही पता लग जाता है कि वैसा पहले किया है या नहीं, जिससे आसानी रहती है. मार्गदर्शन के लिए फैकल्टी के संपर्क में रहना जरूरी होता है.

रोजना दस घंटे पढ़ाई और कोई टेस्ट मिस नहीं: नीट यूजी-2026 परीक्षा में एआईआर-66 के साथ हर्शुल गर्ग चंडीगढ़ में दूसरे स्थान पर रहे. हर्शुल ने बताया कि परीक्षा से पहले उन्होंने दो वर्ष ऐलेन कोचिंग सेंटर से पढ़ाई की. इस दौरान उनका स्टडी शेड्यूल रोजाना दस घंटे का होता था, जिसमें पांच घंटे कोचिंग सेंटर की पढ़ाई और पांच घंटे वो सेल्फ स्टडी करते थे. इसके अलावा वो रेगुलर टेस्टे देते रहे, यहां तक कि परीक्षा तक कभी कोई टेस्ट मिस नहीं किया. उन्होंने कहा कि उनकी इस पूरी जर्नी में मां-पिता और कोचिंग सेंटर की फैकल्टी ने पूरी मदद की. बताया कि जब कभी कोई समस्या या डाउट होती थी, तो फैकल्टी तुरंत उसे क्लियर कर दिया करते थे. साथ ही उनके सही मार्गदर्शन का खूब फायदा मिला, क्योंकि टीचर बता देते थे कि कब कौन सी बुक से कौन सा प्रश्न करना जरूरी होता था. इस कारण उन्हें कभी भी यहां-वहां नहीं जाना पड़ा. नतीजतन परीक्षा का नतीजा आया और उनकी मेहनत कामयाब रही.

टारगेट पर फोकस्ड, लेकिन थकान से बचें: ऑल इंडिया रैंक (एआईआर-29) हासिल करने वाली आशी गोयल ने कहा कि उनकी सफलता में कोचिंग सेंटर की फैकल्टी की बड़ी भूमिका है. वहीं, उन्होंने कहा कि उनका रोजाना कई-कई घंटे पढ़ाई करने से अधिक जरूरी अपने टारगेट को पूरा करने पर अधिक फोकस होता था. जब कभी थकान होती है तो पढ़ाई के घंटे बढ़ाने के बजाय वो दस मिनट की झपकी जरूर लेती थी, ताकि दोबारा उतनी ही एनर्जी के साथ काम किया जा सके. इसके अलावा रोजाना का टारगेट सेट करने के बाद स्वयं को चैलेंज करना भी जरूरी रहता है, जैसे- एक बार जितना कर लिया हो, अगले दिन उससे कुछ अधिक करने पर जोर देना. जब तक स्वयं से थोड़ा अधिक काम नहीं लेंगे तो कुछ ज्यादा हासिल नहीं हो सकेगा.

फिजिक्स-कैमिस्ट्री के लिए अधिक प्रैक्टिस जरूरी: आशी गोयल ने कहा कि किसी सब्जेक्ट को टफ कहना सही नहीं होगा, हालांकि फिजिक्स-कैमिस्ट्री के लिए अधिक से अधिक प्रेक्टिस जरूरी रहती है. जितनी अधिक प्रेक्टिस करते रहेंगे तो वही सब्जेक्ट धीरे-धीरे आसान लगने लगेंगे और उन्हें इंजॉय करने लगते हैं. उन्होंने कहा कि बायो को काफी याद करना पड़ता है, जिस कारण कभी-कभी मुश्किल होती है, लेकिन जितना अधिक से अधिक निरंतर तौर पर रिवाइज करते रहें और मिस होने वाले प्वाइंट्स को धीरे-धीरे लिखने लगें तो वो भी याद होने लगती हैं.

स्टूडेंट खुद पर भरोसा रखें: आशी गोयल ने कहा कि “हर स्टूडेंट का खुद पर भरोसा होना बहुत जरूरी है. क्योंकि जर्नी में उतार-चढ़ावा आते हैं, कभी-कभी बहुत अच्छा होता है तो कभी नहीं भी होता. यदि महीने में एक-दो दिन अच्छे नहीं भी जाते तो कोई बात नहीं, ऐसा हर किसी के साथ होता है. लेकिन दोबारा खुद को री-यूनिट करना बहुत जरूरी है, क्योंकि अपने गोल को याद रखना जरूरी है, क्यों और किन लोगों के लिए कर रहे हैं. इस कारण खुद से कुछ उपर उठना होता है, क्योंकि करके दिखना है. मुझे मां-पिता, दोनों से पूर्ण सहयोग मिला और उन्होंने कभी किसी चीज के लिए दबाव नहीं डाला कि क्या कैसे करना है. परिजनों की गाइडेंस व हेल्प ने हमेशा उन्हें समझाया कि जब कभी पढ़ाई करके हटे हों तो दिमाग को रिफ्रेश करें, ताकि दोबारा अच्छे से पढ़ सकें. कहा कि परीक्षा के समय रिलैक्स रहना जरूरी होता है और हर मुश्किल को मां-पिता के साथ सांझा करना जरूरी है.”

सही योजना और सब्जेक्ट में संतुलन जरूरी: एआईआर-70 हासिल करने पर समर्थ ने कहा कि पढ़ाई के लिए सबसे पहले योजना बनाना जरूरी होता है. सही योजना बनाकर न पढ़ने का कोई फायदा नहीं होता. उन्होंने कहा कि एक बार योजना बनाने के बाद उसे निभाना जरूरी होता है. समर्थ ने बताया कि वो रोजाना एक प्लान पर अपना फोकस करते थे, जैसे सुबह सॉल्विंग और शाम को थ्यौरी, इस तरह उन्होंने तैयारी की. उन्होंने बताया कि वो अपने डाउट को क्लास के बीच और अलग समय में भी टीचरों को पूछ लिया करते थे. हालांकि डाउट क्लियरेंस के लिए एक विशेष दिन भी रहता था.

थ्यौरी करने में बारबार रिवीजन जरूरी: समर्थ ने भी अपने लिए सबसे मुश्किल सब्जेक्ट ‘बायो’ को बताया, क्योंकि थ्योरी कहीं अधिक होती है. नतीजतन कनेक्शन अधिक बनाना बेहतर रहता है, आखिरकार थ्यौरी करने में बारबार रिवीजन जरूरी रहती है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में नीट के स्तर के बारे में कोई पुर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता. इस कारण फिजिक्स में जितने भी अच्छे प्रश्न किए जाएं, वो करने चाहिएं. वहीं, कैमिस्ट्री का सिलेबस बहुत अधिक होता है, नतीजतन हर चीज को कवर करना जरूरी है और बायो में तो रिपिटेशन ही हैं. क्योंकि सबकुछ एनसीईआरटी से ही आता है, फिजिक्स में भी यहीं से आएगा लेकिन इसमें अच्छे प्रश्न बन जाते हैं.

परिजनों ने खुशी जताई: ईटीवी भारत ने उक्त स्टूडेंट के अलावा टॉप करने वाले कुछ अन्य स्टूडेंट के परिजनों से भी बातचीत की. सभी ने अपने बेटियों-बेटों की सफलता की खुशी जाहिर की. बताया कि किस तरह उनके बच्चों ने परीक्षा की तैयारी की और उनकी कामयाबी पर फिलहाल वो अपने जज़्बातों को बयां नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि परिजन अब चाहते हैं कि बच्चों को उनके पसंदीदा मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिल जाए.

Leave A Reply

Your email address will not be published.