सावन में मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए पूजा करते समय न करें ये 4 गलतियां, जानें नियम

सावन के पवित्र महीने में मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए कुंवारी लड़कियां मंगला गौरी और शिव जी की पूजा करती हैं। जानिए पूजा के दौरान किन 4 बड़ी गलतियों से बचना चाहिए।

भक्ति का पावन सावन महीना चल रहा है. मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए सावन में मंगला गौरी और शिव जी की पूजा का विधान है. इस दौरान कुंवारी लड़कियां व्रत रखकर पूजा करती हैं ताकि उन्हें अच्छा जीवनसाथी मिल सके, लेकिन कई बार अनजाने में पूजा के दौरान कुछ भूल हो जाती है, जिससे पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता. कन्याओं को पूजा के दौरान 4 प्रमुख गलतियों से बचना चाहिए. यदि सही नियमों का ध्यान रखकर पूजा की जाए तो माता पार्वती और महादेव प्रसन्न होकर मनचाहा वर प्रदान करते हैं इसलिए पूजा करते समय छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी माना जाता है.

हल्दी, सिंदूर, केतकी और तुलसी के प्रयोग से बचें

पूजा करते समय सामग्री का चयन सही होना चाहिए. हल्दी और सिंदूर शिवलिंग पर न चढ़ाएं. हल्दी और सिंदूर स्त्री तत्व से जुड़े हैं, इन्हें केवल माता पार्वती यानी गौरी पीठ पर अर्पित करें, जलधारी या शिवलिंग पर नहीं. इसके अलावा केतकी और तुलसी पत्र का प्रयोग न करें. भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल और तुलसी दल पूरी तरह वर्जित हैं. कई बार लड़कियां जानकारी न होने पर शिवलिंग पर सिंदूर या तुलसी पत्र चढ़ा देती हैं, जिससे बचना चाहिए. माता पार्वती को सिंदूर और हल्दी चढ़ाएं, जबकि शिव जी को केवल जल और चंदन अर्पित करें. इन बातों का ध्यान रखने से पूजा बिना किसी रुकावट के पूरी होती है.

पूजा में कभी भी खंडित सामग्री न चढ़ाएं

शिवजी की पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. खंडित सामग्री न चढ़ाएं, यानी कटा-फटा बेलपत्र या टूटे हुए चावल भूलकर भी न अर्पित करें. जो भी बेलपत्र आप चढ़ा रहे हैं, वह कहीं से कटा या फटा नहीं होना चाहिए और चावल के दाने पूरी तरह साबुत होने चाहिए. पूजा में हमेशा साफ और साबुत चीजों का ही प्रयोग करना चाहिए. खंडित चीजें अर्पित करने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता. इसलिए जल और फूल चढ़ाते समय पहले उन्हें अच्छी तरह देख लें. जब आप पूरी श्रद्धा और साफ सामग्री से पूजा करते हैं, तो महादेव आपकी हर इच्छा पूरी करते हैं और जीवन में खुशहाली आती है.

शिवलिंग की आधी परिक्रमा का नियम समझें

पूजा समाप्त होने के बाद परिक्रमा करने का भी एक खास नियम होता है. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें. पूजा के बाद हमेशा आधी परिक्रमा ही करें, जलधारी अथवा सोमसूत्र को कभी न लांघें. जहां से जल बहकर बाहर निकलता है, उस जगह को लांघना सही नहीं माना जाता. इसलिए परिक्रमा करते समय जलधारी तक जाकर वापस घूम जाना चाहिए. इस नियम का पालन करने से पूजा का पूरा फल मिलता है. अगर आप इन सभी नियमों का सही से पालन करती हैं और गलतियों से बचती हैं, तो मंगला गौरी और शिव जी की कृपा से आपको मनचाहा और योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.