हरियाणा में 100% हाइब्रिड मोड में होंगी RTI की सुनवाइयां, ऑनलाइन ई-फाइलिंग जल्द

हरियाणा में आरटीआई व्यवस्था को नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए राज्य सूचना आयोग ने महा-अभियान की शुरुआत की है। 25 हजार अधिकारियों की ट्रेनिंग और हाइब्रिड सुनवाई की पूरी जानकारी देखें।

चंडीगढ़ : हरियाणा में सूचना के अधिकार (RTI) व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए राज्य सूचना आयोग ने व्यापक सुधारों का खाका तैयार किया है।

आयोग की ओर से प्रदेश के करीब 25 हजार राज्य लोक सूचना अधिकारियों (एसपीआईओ) और प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों (एफएए) का सालभर चलने वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसमें करीब 6,300 सरपंच भी शामिल होंगे, जो ग्राम स्तर पर एसपीआईओ की जिम्मेदारी निभाते हैं। प्रशिक्षण अभियान 12 अगस्त 2026 से शुरू होगा।

मुख्य सूचना आयुक्त टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने आयोग कार्यालय में आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम में कहा कि लक्ष्य केवल आरटीआई मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि पूरी सूचना व्यवस्था को नागरिकों के लिए सरल, तेज और प्रभावी बनाना है।

25 हजार अधिकारियों की होगी क्षमता वृद्धि
राज्य सूचना आयोग का यह प्रशिक्षण अभियान प्रदेश की लगभग पूरी एसपीआईओ और एफएए व्यवस्था को कवर करेगा। प्रशिक्षण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से दिया जाएगा। अधिकारियों को आरटीआई अधिनियम के कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ उसकी मूल भावना और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण की जानकारी दी जाएगी।

मुख्य सूचना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को केवल यह नहीं सिखाया जाएगा कि कौन-सी सूचना रोकी जा सकती है, बल्कि यह भी बताया जाएगा कि कौन-सी सूचना नागरिक को दी जा सकती है और दी जानी चाहिए। आयोग का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में सूचना उपलब्ध कराने की संस्कृति को मजबूत करना है।

पहली अपील की व्यवस्था होगी मजबूत
आयोग ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों की भूमिका को आरटीआई व्यवस्था का अहम हिस्सा माना है। प्रशिक्षण में एफएए को उनके वैधानिक अधिकारों, जिम्मेदारियों और अर्द्ध-न्यायिक भूमिका के बारे में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आयोग का मानना है कि यदि विभागीय स्तर पर ही पहली अपील का प्रभावी समाधान हो जाए तो बड़ी संख्या में मामले दूसरी अपील के रूप में आयोग तक पहुंचने से रोके जा सकते हैं। इसी तरह एसपीआईओ को स्पष्ट, तथ्यपूर्ण, तर्कसंगत और कानून के अनुरूप जवाब देने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

एएससीआई और एचआईपीए देंगे प्रशिक्षण में सहयोग
मेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए आयोग ने एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया, हैदराबाद (एएससीआई) और हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एचआईपीए) के साथ सहयोग किया है। आवश्यकता के अनुसार विधि संस्थानों से विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। आयोग के अनुसार यह देश के सबसे व्यापक आरटीआई क्षमता-वर्धन कार्यक्रमों में से एक होगा।

अब 100 फीसदी हाइब्रिड मोड में होगी सुनवाई
आरटीआई मामलों की सुनवाई को भी तकनीक से जोड़ते हुए आयोग ने 100 प्रतिशत हाइब्रिड मोड अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे अपीलकर्ता और संबंधित अधिकारी आयोग कार्यालय आए बिना ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। इससे विशेष रूप से दूरदराज के जिलों के नागरिकों को राहत मिलेगी। साथ ही सुनवाई में अनावश्यक स्थगन कम करने के लिए एसपीआईओ को ऑनलाइन सुनवाई के दौरान अपने कार्यालय से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध रखने के निर्देश दिए जाएंगे।

हाई कोर्ट की तर्ज पर केंद्रीय पंजीकरण इकाई
आयोग में केंद्रीय पंजीकरण इकाई स्थापित की गई है। यह व्यवस्था उच्च न्यायालयों में अपनाई जाने वाली पंजीकरण प्रणाली की तर्ज पर काम करेगी। मामलों का व्यवस्थित पंजीकरण और प्रारंभिक जांच के बाद रजिस्ट्रार स्तर पर उनका आवंटन किया जाएगा। सूचना आयुक्तों को विभागवार सीमित रखने की पुरानी व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब एक आयुक्त को एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकेगी, जिससे मामलों का संतुलित वितरण और तेजी से निस्तारण सुनिश्चित हो।
दूसरी अपील और शिकायत की ई-फाइलिंग जल्द
आयोग अपने वेब पोर्टल के जरिए जल्द ही दूसरी अपील और शिकायतों की ऑनलाइन ई-फाइलिंग की सुविधा शुरू करेगा। फिलहाल आरटीआई आवेदन और पहली अपील ऑनलाइन दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा डिजिटल हो जाएगा। इसके साथ ही प्राथमिकता वाली सुनवाई के लिए पोर्टल पर ‘लाइव लिंक’ सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से पक्षकार उपलब्ध तारीख और समय के आधार पर प्राथमिकता सुनवाई का अनुरोध कर सकेंगे।

पेपरलेस आयोग की ओर बढ़े कदम
आयोग के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है। इससे पुराने दस्तावेजों तक इलेक्ट्रॉनिक पहुंच आसान होगी और रिकॉर्ड प्रबंधन अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनेगा। फाइलों के गुम होने या दस्तावेजों की तलाश में लगने वाला समय भी कम होगा।
निर्णयों की जानकारी के लिए जर्नल और बुलेटिन
आयोग महत्वपूर्ण फैसलों और आरटीआई की कानूनी व्याख्या को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए त्रैमासिक जर्नल और ‘इम्पोर्टेंट केसेज बुलेटिन’ शुरू करने की तैयारी में है। आयोग के महत्वपूर्ण निर्णय वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे नागरिकों, एसपीआईओ, एफएए और विधि विशेषज्ञों को आरटीआई कानून के अनुपालन में एकरूपता लाने में मदद मिलेगी।

‘सिर्फ मामले निपटाना नहीं, पूरी व्यवस्था बदलना लक्ष्य’
टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल लंबित मामलों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि आरटीआई की पूरी व्यवस्था को सुलभ, तकनीक-सक्षम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। उन्होंने कहा कि आरटीआई की असली सफलता इस बात में है कि सूचना कितनी प्रभावी ढंग से नागरिक तक पहुंचती है। कार्यक्रम में राज्य सूचना आयुक्त अमरजीत सिंह, करमवीर सैनी, नीता खेरा, संजय मदान और अजय सूरा सहित आयोग के अधिकारी मौजूद रहे।

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