फरीदाबाद में 700 फीट नीचे गिरा भूजल स्तर, IIT-BHU के साथ 10 जगहों पर लगेगा शैलो एक्वीफर सिस्टम
फरीदाबाद में गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए नगर निगम और IIT-BHU मिलकर 10 स्थानों पर शैलो एक्वीफर सिस्टम लगाएंगे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
फरीदाबाद: फरीदाबाद में लगातार नीचे जा रहे भूजल स्तर ने नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है. शहर में भूजल भंडार को सुरक्षित रखने और बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर जलस्तर सुधारने की संभावनाएं तलाशने के लिए अब वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कराया जाएगा. इसके लिए नगर निगम आईआईटी-बीएचयू के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेगा. शहर में 10 स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां भूजल की मौजूदा स्थिति, जमीन की संरचना और पानी के रिचार्ज की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा.
10 जगहों पर वैज्ञानिक जांच: नगर निगम की प्रस्तावित योजना के तहत चयनित स्थानों पर भूजल की गहराई और जमीन के नीचे मौजूद एक्वीफर सिस्टम का अध्ययन किया जाएगा. विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि किन जगहों पर बारिश का पानी जमीन के अंदर पहुंचाना अधिक प्रभावी रहेगा. अध्ययन के परिणामों के आधार पर संबंधित स्थानों पर भूजल रिचार्ज के लिए तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे.
पहली बार शैलो एक्वीफर सिस्टम की तैयारी: फरीदाबाद में पहली बार शैलो एक्वीफर सिस्टम लगाने की तैयारी की जा रही है. परियोजना के तहत एक स्थान पर सिस्टम स्थापित करने पर करीब 5 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है. 10 स्थानों पर इसे लगाने की संभावित लागत करीब 50 लाख रुपये होगी. योजना शहरी विकास मंत्रालय के स्तर पर प्रस्तावित है और नगर निगम ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है.
बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने पर जोर: योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य बारिश के पानी का अधिक से अधिक हिस्सा जमीन के अंदर पहुंचाना है. शहरीकरण के कारण फरीदाबाद में प्राकृतिक रूप से पानी जमीन में जाने की क्षमता कम हुई है. कंक्रीट की सड़कें, इमारतें और अन्य निर्माण बारिश के पानी को जमीन में समाने से रोकते हैं. ऐसे में पानी नालियों और सड़कों के रास्ते बह जाता है, जबकि दूसरी तरफ घरेलू जरूरतों के लिए भूजल का लगातार दोहन होता रहता है.
कई इलाकों में 500 से 700 फीट नीचे पानी: फरीदाबाद के कई हिस्सों में भूजल स्तर बेहद नीचे पहुंच चुका है. बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कुछ इलाकों में भूजल 700 फीट से भी नीचे जाने की बात सामने आ रही है. वहीं एनआईटी क्षेत्र के कई स्थानों पर जलस्तर 500 फीट से नीचे पहुंच चुका है. ऐसे क्षेत्रों को भूजल की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. जलस्तर में लगातार गिरावट से भविष्य में पेयजल उपलब्धता को लेकर भी चुनौती बढ़ सकती है.
ट्यूबवेल भी हो रहे प्रभावित: भूजल नीचे जाने का सीधा असर नगर निगम की पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है. निगम के कई ट्यूबवेल पानी का स्तर नीचे जाने के कारण प्रभावित हुए हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार नगर निगम के करीब 1,690 ट्यूबवेल हैं, जिनमें लगभग 200 ट्यूबवेल भूजल स्तर गिरने के कारण खराब हो चुके हैं. इससे शहर में पानी की आपूर्ति बनाए रखना निगम के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
156 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम: बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने के लिए नगर निगम ने शहर में करीब 156 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए हैं. हालांकि इनके नियमित रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं. बड़ी संख्या में सिस्टम खराब स्थिति में बताए जा रहे हैं. यहां तक कि नगर निगम मुख्यालय में लगा रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा है. इससे मौजूदा व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
पुराने सिस्टम से अपेक्षित लाभ नहीं: नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सामान्य रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूजल स्तर को अपेक्षित तरीके से बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है. इसी वजह से अब वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए ऐसे स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां बारिश के पानी को भूजल भंडार तक पहुंचाने की बेहतर संभावना हो. कार्यकारी अभियंता नितिन कादयान के अनुसार, “वैज्ञानिक अध्ययन के लिए 10 स्थान चिह्नित किए गए हैं.” इन स्थानों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की तकनीकी योजना तैयार की जाएगी.
इन 10 स्थानों पर होगा अध्ययन: अध्ययन के लिए सेक्टर-21डी स्थित विवेकानंद पार्क, नगर निगम सभागार, तिकोना पार्क सरकारी स्कूल, सैनिक कॉलोनी कम्युनिटी सेंटर, सेक्टर-8 स्थित सूरदास पार्क, सेक्टर-91 स्थित राजेंद्र पार्क, सेक्टर-21 का बूस्टिंग स्टेशन, सेक्टर-3 पार्क, सेक्टर-7 मार्केट और सेक्टर-9 को चुना गया है. इन सभी जगहों पर जमीन की बनावट, भूजल की गहराई और रिचार्ज क्षमता का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा.
96 एमएलडी पानी की कमी: फरीदाबाद में पेयजल की मांग और उपलब्धता के बीच भी बड़ा अंतर बना हुआ है. जिले में रोजाना करीब 379 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि लगभग 283 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है. इस तरह करीब 96 एमएलडी पानी की कमी बनी हुई है. वर्तमान में नगर निगम 69 बूस्टिंग स्टेशनों के माध्यम से पानी की सप्लाई कर रहा है. ऐसे में भूजल पर निर्भरता कम करना बड़ी चुनौती है.
वैज्ञानिक योजना से उम्मीद: नगर निगम के सामने अब दोहरी चुनौती है. एक तरफ शहर की मौजूदा पेयजल जरूरत पूरी करनी है, वहीं दूसरी ओर तेजी से गिरते भूजल स्तर को रोकना है. 10 स्थानों पर वैज्ञानिक अध्ययन और शैलो एक्वीफर सिस्टम की योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. यदि चयनित स्थानों पर बारिश के पानी को प्रभावी तरीके से जमीन के भीतर पहुंचाने में सफलता मिलती है तो भविष्य में इस तकनीक को शहर के अन्य हिस्सों में भी अपनाया जा सकता है.