फर्जी ट्रांसपोर्ट और पानी के बिल लगाकर कंपनी को लगाया चूना, डीएलएफ फेज-3 थाने में केस दर्ज

अपैरल ग्रुप के स्टोर मैनेजर ने रिश्तेदारों के नाम फर्जी वेंडर बनाकर 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। पुलिस जांच में जुटी।

गुड़गांव : अपैरल ग्रुप के स्टोर मैनेजर द्वारा अपने रिश्तेदारों को वेंडर बनाकर ट्रांसपोर्ट, पानी सप्लाई, पेस्ट कंट्रोल सहित अन्य सुविधाओं के नाम पर धोखाधड़ी कर ली। इंटरनल ऑडिट के दौरान फर्जी बिल पाए जाने के बाद जब जांच की गई तो पाया कि मैनेजर ने अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में करीब 2 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं। इसके अलावा अभी 5 लाख रुपए की कंपनी पर देनदारी बकाया दर्शाई गई है। इस मामले में अपैरल ग्रुप के इंटरनल ऑडिट के सीनियर मैनेजर विलफ्रेड कराथरा ने पुलिस को शिकायत दी। आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने एक महीने तक मामले की जांच करने के बाद डीएलएफ फेज-3 थाने में केस दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक, सीनियर मैनेजर ने शिकायत में बताया कि उनके देश के अलग-अलग हिस्सों में कई स्टोर हैं। इनमें गुड़गांव के स्टोर पर प्रदीप कुमार को बतौर स्टोर मैनेजर लगाया गया है। आरोप है कि प्रदीप कुमार ने स्टोर से कई वेंडरों को कनेक्ट किया गया। इसमें ट्रांसपोर्ट, पानी सप्लाई, पेस्ट कंट्रोल सहित अन्य सुविधाएं प्राप्त की जा रही थी। इसके लिए बिल भी कंपनी में पेश कर उनका भुगतान भी किया गया था। हाल ही में कंपनी में इंटरनल ऑडिट की जा रही थी। इस दौरान कुछ बिल पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इन बिल की जांच की गई तो यह बिल फर्जी पाए गए। जांच के दौरान स्टोर के कर्मचारियों से भी बात की गई और पता लगा कि पेस्ट कंट्रोल के नाम पर जो भी बिल लगाए गए हैं वह सभी फर्जी हैं। स्टोर में पेस्ट कंट्रोल कराया ही नहीं गया है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट व पानी के बिल में भी गड़बड़ी पाई गई।

कंपनी के अधिकारियों ने पुलिस को शिकायत में बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि प्रदीप कुमार ने जिस शिव टूर ट्रेवल्स के बिल कंपनी में लगाकर भुगतान किया है वह ट्रांसपोर्ट प्रदीप की पत्नी लक्ष्मी देवी का है। इसके अलावा वेलमोटिव इंटरप्राइजेस नामक कंपनी प्रदीप के भाई कुलदीप कुमार उर्फ अमन के नाम पर है। वहीं, रिटेलेक्स इंटरप्राइजेज नामक कंपनी प्रदीप की बहन सुमेश से संबंधित है। इन कंपनियों को करीब दो करोड़ रुपए की फर्जी बिल के माध्यम से पेमेंट की गई है और अभी कंपनी पर 5 लाख रुपए की देनदारी बकाया दिखाई गई है।

उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि प्रदीप ने कंपनी के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को यह तक नहीं बताया कि जिन वेंडरों को वह कंपनी से जोड़ रहा है वह उसके भाई-बहनों की है। जब कंपनी अधिकारियों ने उससे पूछताछ की तो प्रदीप ने सभी बातें कबूल ली। इस पर उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने मामले को जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा में भेजा। यहां जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई जिसके बाद मामले को डीएलएफ फेज-3 थाने में भेज दिया गया। यहां पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा  318(4), 316(4), 338, 336(3),340,61(2) के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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