कैथल निवासी सूरजमल की अपील हाईकोर्ट में खारिज, बिना ठोस कारण रिकॉर्ड सुधार संभव नहीं

सरकारी सेवा रिकॉर्ड में जन्मतिथि बदलने को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला। अत्यधिक देरी और ठोस कारण बिना बदलाव नामुमकिन।

चंडीगढ़ : सरकारी सेवा रिकॉर्ड में वर्षों से दर्ज जन्मतिथि को बाद में बदलवाना आसान नहीं होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय तक एक जन्मतिथि स्वीकार करता रहा हो और बाद में बिना ठोस कारण बदलाव की मांग करे तो केवल जन्म प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड नहीं बदला जा सकता।

जस्टिस हरकेश मनुजा ने कैथल निवासी सूरजमल की नियमित द्वितीय अपील खारिज करते हुए कहा कि उसने 1985 में मैट्रिक परीक्षा का फार्म खुद भरते समय जन्मतिथि 1 दिसम्बर 1968 दर्ज की थी। 1997 में सरकारी सेवा में नियुक्ति के समय भी यही तारीख सेवा पुस्तिका में दर्ज हुई। सूरजमल ने 2008 में दावा किया कि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 2 जुलाई 1969 है और गांव के चौकीदार रजिस्टर व जन्म प्रमाणपत्र को आधार बनाकर रिकॉर्ड सुधारने की मांग की। हाईकोर्ट ने कहा कि वह करीब 23 वर्षों तक दर्ज जन्मतिथि को स्वीकार करता रहा और यह भी स्पष्ट नहीं कर सका कि उसे कथित गलती का पता इतने वर्षों बाद कैसे चला।

अदालत ने कहा कि जन्मतिथि सुधार कर्मचारी का अधिकार मात्र नहीं है। अत्यधिक देरी और पर्याप्त कारण न होने पर दावा खारिज किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

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