बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को मिली वैश्विक पहचान, UN में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास
संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह उन्मूलन दिवस घोषित किया। भारत के लिए बड़ी उपलब्धि।
जींद : संयुक्त राष्ट्र महासभा में 5 सितंबर 2026 को हर साल 27 नवंबर को आधिकारिक तौर पर ‘बाल, प्रारंभिक और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ घोषित करने से जुड़ा ऐतिहासिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया है ।
इस अभूतपूर्व सफलता देश के प्रसिद्ध बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता, ‘सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन’ के संस्थापक एवं बाल आज़ादी अभियान के प्रमुख सुनील जागलान ने अपनी ओर से अपार खुशी व्यक्त करते हुए इसे एक ‘सपने के सच होने’ जैसा बताया है। सुनील जागलान ने कहा कि वर्ष 2012 से बाल पंचायतों के माध्यम से बच्चों की स्वतंत्रता और बाल आजादी की आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं के लिए यह दिन एक नया ऐतिहासिक सवेरा लेकर आया है।
गौरतलब है कि अफ़्रीकी देशों की प्रथम महिलाओं के विकास संगठन ओएएफएलएडी की अध्यक्ष और सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर दुनिया भर के देशों की मुहर लगना न केवल भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक और सामाजिक जीत है, बल्कि यह देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त, दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व में भारत ने बाल विवाह जैसी सदियों पुरानी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ जो निर्णायक अभियान शुरू किया था, आज उसने वैश्विक जनांदोलन का रूप ले लिया है। असंभव से दिखने वाले ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारने में ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ के संस्थापक भुवन ऋभु के अनथक प्रयासों, अटूट जज्बे और दूरदर्शिता ने निर्णायक भूमिका निभाई है।
भुवन ऋभु ने बाल अधिकारों की रक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए जो पवित्र शपथ ली थी, उसे पूरा करने की दिशा में यह अंतर्राष्ट्रीय मान्यता एक स्वर्णिम तमगे की तरह जुड़ी है। उनके द्वारा देश और दुनिया के हर व्यक्ति में बाल अधिकारों के प्रति चेतना जगाने का जो क्रांतिकारी प्रयास किया गया, उसी की बदौलत आज भारत का यह सफल मॉडल पूरी दुनिया की नीति का आधार बन चुका है।
सुनील जागलान ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और भुवन ऋभु जी के अटूट जज्बे ने आज इतिहास रच दिया है। जिस 27 नवंबर को भारत में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की मजबूत नींव रखी गई थी, उसी तारीख को आज संयुक्त राष्ट्र महासभा के माध्यम से पूरी दुनिया ने अंतर्राष्ट्रीय बाल विवाह उन्मूलन दिवस के रूप में स्वीकार कर लिया है।
भुवन ऋभु जी ने न्यूयॉर्क में मौजूद रहकर जिस तरह बच्चों की बेज़ुबान आवाज़ को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बुलंद किया और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्ष्य बने, उसने यह साबित कर दिया है कि भारत केवल नीतियां नहीं बनाता, बल्कि पूरी दुनिया को दिशा भी दिखाता है। हमारी बेटियों और मासूम बेटों को बाल विवाह की बेड़ियों से मुक्त कराने की दिशा में यह हम सभी के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।”
यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस अब दुनिया भर के देशों को अपनी कानूनी कमियों (जैसे प्रथागत छूटों और माता-पिता की सहमति के बहाने होने वाले बाल विवाह) को खत्म करने और सख्त कानून लागू करने के लिए बाध्य करेगा। भारत के इस क्रांतिकारी मॉडल और भुवन ऋभु के विजन ने साबित कर दिया है कि सही दिशा और मजबूत राजनीतिक व सामाजिक इच्छाशक्ति से दुनिया के किसी भी कोने से बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।