कौन है 21 साल की यह लड़की, जिसने बनाई हिट फिल्म हनुमान अंश

स्टीव जॉब्स से नीम करौली बाबा तक पहुंची जिज्ञासा, इकोनॉमिक्स ग्रेजुएट अनुप्रिया ने बिना फिल्मी अनुभव उठाया बड़ा जोखिम; श्रद्धा और मजबूत वर्ड ऑफ माउथ ने छोटे बजट की फिल्म को बनाया ब्लॉकबस्टर

मनोरंजन डेस्क। नई दिल्ली। बड़े सितारे नहीं, भारी-भरकम बजट नहीं और न ही किसी विशाल फिल्मी घराने का सहारा—फिर भी नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा कमाल किया है, जिसने फिल्म उद्योग का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। करीब ₹2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।
लेकिन ‘हनुमान अंश’ की सफलता जितनी दिलचस्प है, उतनी ही प्रेरक इसकी 21 वर्षीय युवा निर्माता अनुप्रिया नागर की कहानी भी है।
स्टीव जॉब्स से शुरू हुई नीम करौली बाबा को जानने की यात्रा
यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई करने वाली अनुप्रिया नागर की जिंदगी में बदलाव उस समय आया, जब पढ़ाई के दौरान स्टीव जॉब्स पर किए जा रहे एक प्रोजेक्ट ने उनका ध्यान नीम करौली बाबा की ओर खींचा। उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि भारत के एक संत और उनकी आध्यात्मिक विरासत के बारे में उन्हें विदेशियों के माध्यम से जानकारी मिल रही है।
यही जिज्ञासा धीरे-धीरे एक संकल्प में बदल गई—भारत की आध्यात्मिक विरासत और महाराज जी की शिक्षाओं को नई पीढ़ी, विशेषकर Gen-Z, तक पहुंचाने का।
विदेश में करियर छोड़ भारत लौटीं
अनुप्रिया के सामने विदेश में करियर बनाने का रास्ता खुला था, लेकिन उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। फिल्म निर्माण का कोई पूर्व अनुभव नहीं होने के बावजूद उन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के साथ मिलकर ‘हनुमान अंश’ को आकार दिया।
रिपोर्टों के अनुसार अनुप्रिया ने ब्रिटेन में तीन वर्षों तक पार्ट-टाइम काम करके जो बचत की थी, उसे भी इस फिल्म के निर्माण में लगा दिया। महज 21 वर्ष की उम्र में उठाया गया यह जोखिम आखिरकार असाधारण सफलता में बदल गया।
पहले धीमी रफ्तार, फिर दर्शकों ने बना दिया आंदोलन
7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ की शुरुआत बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और मजबूत ‘वर्ड ऑफ माउथ’ ने धीरे-धीरे तस्वीर बदल दी। फिल्म ने बाद के सप्ताहों में जबरदस्त रफ्तार पकड़ी और ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई।
फिल्म की सफलता यह भी दिखाती है कि दर्शकों को छू लेने वाली कहानी के सामने बड़ा बजट और स्टार पावर ही सफलता की अनिवार्य शर्त नहीं हैं।
मुनाफे से ज्यादा उद्देश्य था नई पीढ़ी तक महाराज जी की कथा पहुंचाना
अनुप्रिया नागर के अनुसार उनका मूल उद्देश्य बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि नीम करौली बाबा की कथा और आध्यात्मिक संदेश को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना था।
यही कारण है कि ‘हनुमान अंश’ की सफलता को केवल व्यावसायिक उपलब्धि के रूप में देखना शायद अधूरा होगा। यह उस युवा सोच की कहानी भी है, जिसने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया।
अब बनेगा ‘हनुमान अंश’ का अगला भाग
फिल्म को मिली अप्रत्याशित सफलता के बाद अनुप्रिया नागर ने इसके आगे के हिस्सों पर काम करने की योजना भी जाहिर की है। यानी ‘हनुमान अंश’ की यात्रा ₹100 करोड़ के आंकड़े पर समाप्त होने वाली नहीं है।
21 वर्ष की उम्र, पहली फिल्म, करीब ₹2 करोड़ का बजट और ₹100 करोड़ से अधिक का बॉक्स ऑफिस कारोबार—‘हनुमान अंश’ की कहानी भारतीय सिनेमा में इस बात का उदाहरण बनकर उभरी है कि यदि विषय में दम, प्रस्तुति में ईमानदारी और दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव हो, तो एक छोटी फिल्म भी बड़े-बड़े समीकरण बदल सकती है।
जगत क्रान्ति विशेष

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