Greater Noida Student Notice Controvery: सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले की सुनवाई, यूपी पुलिस बोली- 5 सितंबर को ही निरस्त कर दिया था नोटिस

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में ग्रेटर नोएडा के छात्र को नोटिस पर SC ने लगाई फटकार। यूपी पुलिस ने कहा- गलती से जारी हुआ था, डीएम का संबंध नहीं।

जंतर-मंतर पर हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर ग्रेटर नोएडा की कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने एक छात्र अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी कर दिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि हमारे आदेश के बावजूद आपने ऐसा नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की। वहीं इस मामले को लेकर अब उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें उसने नोएडा की डीएम मेधा रूपम का बचाव करते हुए बताया कि यह नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट से गलती से जारी हो गया था और कहा कि जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर का इस प्रकरण से कोई सम्बन्ध नहीं है।

इस बारे में सोशल मीडिया पर जारी किए अपने स्पष्टीकरण में ग्रेटर नोएडा के डीसीपी ने बताया कि ‘गौतमबुद्धनगर के ईकोटेक प्रथम इलाके में रहने वाले अक्षत त्रिपाठी पुत्र विनोद कुमार त्रिपाठी को कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय द्वारा धरना-प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर 4 सितंबर को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए नोटिस जारी किया गया था। हालांकि इस बात की जानकारी उच्चाधिकारियों को मिलते ही दिनांक 5 सितंबर को गलती से जारी किए गए इस नोटिस को निरस्त कर दिया गया था।’

पुलिस बोली- गलती से हो गया था जारी

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया कि ‘गलती से जारी किए गए इस नोटिस और इस मामले में बरती गई लापरवाही के सम्बन्ध में सम्बन्धित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही पहले ही शुरू की जा चुकी है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि ‘गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के कारण प्रश्नगत नोटिस कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्धनगर से जारी किया गया है और जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर का इस प्रकरण से कोई सम्बन्ध नहीं है।

अदालत ने पूछा- कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा कैसे कर सकती है

इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि वह इस मामले में ग्रेटर नोएडा की कार्यकारी मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकती हैं, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वकील बोले- छात्रों पर किया जा रहा प्रयोग

उधर वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने सीजेआई की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों पर ‘प्रयोग’ किया जा रहा है और यह नोटिस भी सु्प्रीम कोर्ट के एक सितंबर के दिए आदेश के विपरीत था। उन्होंने बताया कि हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया।

SC ने कहा- कार्रवाई का कोई सवाल ही नहीं

इसके आगे भट्टाचार्य ने कहा कि प्रथम दृष्टया अधिकारी अदालत की अवमानना के दोषी हैं और बाद में नोटिस वापस ले लेने से उन्हें अवमानना की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। इस पर सीजेआई ने कहा, ‘आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। हमारे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है। हमने स्पष्ट आदेश पारित किया है।’

‘हम पूछेंगे उन्होंने ऐसा क्यों किया?’

सीजेआई ने कहा, ‘हमें हैरानी है कि मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकती हैं, जबकि हमने पहले ही किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। यह बिल्कुल स्पष्ट आदेश था।’ प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठ वकील से मामले के तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा। उन्होंने कहा, ‘हम स्पष्टीकरण मांगेंगे। वह बताएं कि ऐसा क्यों किया गया।’ पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.