नोएडा अथॉरिटी पर किसान महापंचायत, राकेश टिकैत बोले- मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा धरना

नोएडा में किसानों की मांगों को लेकर राकेश टिकैत ने खोला मोर्चा। तीनों अथॉरिटी के खिलाफ महापंचायत और प्रदर्शन जारी।

नोएडा में किसानों की मांगों को लेकर किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत ने मोर्चा खोल लिया है। वे सोमवार को नोएडा पहुंचे इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में किसान भी थे जो कि अपनी मांगों को लेकर इकट्ठा हुए। राकेश टिकैत नोएडा अथॉरिटी के दफ्तर पर आयोजित महापंचायत में पहुंचे। इस दौरान टिकैत ने जिले की तीनों अथॉरिटी (नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी) पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मांगें पूरी होने तक धरने पर डटे रहने का आह्वान किया।

जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसान 10% आवासीय प्लॉट, आबादी से जुड़े मामलों का निपटारा और नए कानून के अनुसार 20 फीसदी भूखंड लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा किसान चाहते हैं कि 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो। बीते कुछ दिनों से जारी इस धरना प्रदर्शन में अलग-अलग किसान संगठन शामिल हैं। किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है।

क्या बोले राकेश टिकैत?

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ‘तीनों अथॉरिटी से बातचीत होगी। जब तक कोई समाधान नहीं होगा और ठोस निर्णय नहीं होगा जब तक हम यहां पर रहेंगे। अगर अगर अभी भी कोई समाधान नहीं निकल रहा है तो किसान तो सिर्फ धरने पर बैठ सकता है। यहां पर तीन अथॉरिटी है और हम तीनों पर जाएंगे। हमारी मुख्य मांग यह है कि 64.7 प्रतिशत मुआवजे, जो प्लॉट दिए जाने हैं वे अलॉट किए जाएं और जिस जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा उनका रेट बढ़ाया जाए।’

लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे किसान

दरअसल किसानों अपनी इन्हीं मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं मगर लेकिन कई बार बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला है। ऐसे में अब किसानों ने तीनों अथॉरिटी के बाहर अपना प्रदर्शन तेज कर दिया है।

यमुना अथॉरिटी के बाहर भी धरना प्रदर्शन

राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान यमुना अथॉरिटी के बाहर भी सड़क पर धरने पर बैठे। इस दौरान वहां जाम की स्थिति बन गई। इस दौरान भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।

राकेश टिकैत ने इस दौरान कहा कि साल के चार महीने रह गए, चार महीने आंदोलन करो कुछ ना कुछ मिलेगा, नहीं तो सरकार की राह बैठेगी, नोएडा में किसानों ने आंसू गैस के गोले नहीं देखें, उनका धुंआ नहीं देखा, लाठीचार्ज नहीं हुआ, अब यहां आंदोलन करो, हम भी यहीं रहेंगे, अपने नेताओं को भी दी सलाह अधिकारियों से दूरी बनाकर रखो।

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