Ghaziabad News Today: सुसाइड नोट में एकेडमिक प्रेशर का जिक्र, गाजियाबाद के विजयनगर में दर्दनाक हादसे से पसरा मातम
गाजियाबाद के विजयनगर में 15वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली 10वीं की छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 20 हड्डियां टूटने की पुष्टि।
गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र की सिद्धार्थ सोसाइटी में 15वीं मंजिल से कूदकर जान गवाने वाली 16 वर्षीय छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा के हाथ, पैर और सिर समेत शरीर की करीब 20 हड्डियां टूट गई थीं. सिर में लगी चोट इतनी गंभीर थी कि उसकी हड्डियों को भी भारी नुकसान पहुंचा.
पुलिस को मौके से छात्रा का सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने पढ़ाई के दबाव से परेशान होने की बात लिखी है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है. जानकारी के मुताबिक, सिद्धार्थ सोसाइटी निवासी छात्रा इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल में कक्षा दसवीं में पढ़ाई कर रही थी. मंगलवार करीब 6:45 बजे वह सोसायटी की 15वीं मंजिल से नीचे कूद गई. इसकी ऊंचाई करीब 150 फीट के आसपास बताई गई.
पढ़ाई के दबाव से परेशान थी छात्रा
घटना के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस टीम ने छात्रा को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद पुलिस को मौके से छात्रा का लिखा हुआ सुसाइड नोट मिला. पुलिस के अनुसार, नोट में छात्रा ने एकेडमिक प्रेशर यानी पढ़ाई के दबाव से परेशान होने की बात कही. पुलिस ने सुसाइड नोट को जांच का हिस्सा बनाया है.
मृतक छात्रा के परिवार से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके की घटना से पहले उसके सामने किस तरह की परिस्थितियों थीं. परिजनों का कहना है कि छात्रा परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी और उसकी मौत से पूरा परिवार सदमे में है. पिता ने कहा कि अगर बेटी पढ़ाई को लेकर किसी तरह के दबाव में थी तो उसे परिवार से इस बारे में बात करनी चाहिए थी.
पुलिस की कार्रवाई पर परिवार ने जताई आपत्ति
परिवार ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई है. एसीपी कोतवाली उपासना पांडे के मुताबिक, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की है. सुसाइड नोट की जांच के साथ ही पुलिस परिवार से और सोसाइटी में भी घटना से संबंधित जानकारी जुटा जा रही है. पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका है, लेकिन घटना से जुड़ी सभी परिस्थितियों की जांच की जा रही है.
वहीं इस घटना ने एक बार फिर पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े दवाब को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में तनाव या दबाव के संकेत दिखाई दें तो परिवार को उनसे खुलकर बात करनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए, ताकि किसी भी बड़ी अनहोनी घटना को रोका जा सके.