संजय कुमार सोनकर मौत मामला, हाईकोर्ट ने कहा- सबूत पेश करने की जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों की

गोंडा में आरपीएफ हिरासत में हुई संजय सोनकर की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने दो आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गोंडा में 35 साल के एक शख्स की कथित तौर पर हिरासत में हुई मौत के मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के आरोपी 2 जवानों की अग्रिम जमानत याचिकाएं कल बुधवार को खारिज कर दीं. फैसले देते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही कोविड-19 महामारी खत्म हो गई हो, लेकिन हिरासत में मौत का सिलसिला कम होता नहीं दिख रहा है.

जस्टिस मनीष माथुर ने रेलवे सुरक्षा बल के दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव की अलग-अलग अपीलों को खारिज कर दिया. इन दोनों आरोपियों ने गोंडा के स्पेशल जज (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एक्ट) के 4 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं.

गोंडा का मामला, तेल चोरी से जुड़ा केस

मामला गोंडा के किंकी गांव का है. यहां के रहने वाले संजय कुमार सोनकर की कथित रूप से हिरासत में मौत हो गई थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार पिछले साल 28 सितंबर को गोंडा से गुवाहाटी जा रही एक मालगाड़ी से मोतीगंज रेलवे स्टेशन इलाके में सरसों के तेल के 6 डिब्बे चोरी हो गए थे और आरपीएफ की ओर से की गई जांच में संजय सोनकर का नाम सामने आया.

चार नवंबर 2025 को आरपीएफ के जवान संजय सोनकर को पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर गए थे और शाम करीब साढ़े 4 बजे उसे जांच के सिलसिले में उसके गांव लेकर आए और बाद में उसे फिर वापस लेकर चले गए. अगली सुबह सोनकर के भाई को यह जानकारी दी गई कि उसके भाई का शव मुर्दाघर में है.

हिरासत में मारपीट से गई सोनकर की जान

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि हिरासत में रखने के दौरान संजय सोनकर के साथ जमकर मारपीट की गई, और इस वजह से उसकी मौत हो गई. इसके खिलाफ अपील दायर करते हुए आरपीएफ के दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें इस केस में गलत फंसाया गया है.

इन आरपीएफ कर्मियों के वकील ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें जांघ के ऊपरी हिस्से पर चोट और दोनों घुटनों पर खरोंच का जिक्र था. उनकी दलील है कि इन चोटों की वजह से किसी की मौत नहीं हो सकती.

सबूत पेश करने की जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों कीः HC

हालांकि सुनवाई के दौरान बेंच ने दोनों की अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह सबूतों के आधार पर तय किया जाएगा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के नतीजे आरोपों का समर्थन करते हैं या नहीं.

बेंच ने कोरोना के दौर का जिक्र करते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि भले ही कोरोना महामारी का दौर खत्म हो गया है, लेकिन हिरासत में मौत की समस्या कम होती नहीं दिख रही है.” कोर्ट ने कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में आम तौर पर सबूत पेश करने की जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों की होनी चाहिए ताकि वे अपने गलत व्यवहार के कारण इंसानी जिंदगी को कमतर आंकने के आरोपों को गलत साबित कर सकें. कोरोना के दौर में हिरासत में मौत को लेकर कई केस सामने आए थे.

Leave A Reply

Your email address will not be published.