डलहौजी में भालू के बच्चे के मुंह में फंसा कनस्तर, वन विभाग की टीम ने सुरक्षित बचाया
हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में बस स्टैंड के पास मुंह में कनस्तर फंसे भालू का हुआ सफल रेस्क्यू। वन विभाग ने सुरक्षित जंगल में छोड़ा।
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल डलहौजी में शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बस स्टैंड के पास एक भालू का बच्चा मुंह में कनस्तर फंसी हालत में दिखाई दिया. भालू को इस हालत में देखकर मौके पर मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया. लोगों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया.
वन विभाग की टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती भालू को सुरक्षित तरीके से काबू में करना था. मुंह में कनस्तर फंसे होने के कारण भालू काफी परेशान नजर आ रहा था. रेस्क्यू के दौरान वह लगातार बचने की कोशिश कर रहा था. वन विभाग के कर्मचारियों ने पहले उसे सुरक्षित तरीके से वाहन में बैठाने का प्रयास किया, ताकि उसे जंगल में ले जाकर कनस्तर निकालने की कार्रवाई की जा सके.
डीएफओ खुद मौके पर पहुंचे
डलहौजी के डीएफओ कुलदीप जमवाल को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, वह खुद मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान की निगरानी की. उन्होंने बताया कि भालू का मुंह कनस्तर में फंसा हुआ था और आशंका है कि यह कई दिनों से उसके मुंह में फंसा रहा होगा. इसके कारण भालू को खाने-पीने में भी परेशानी हुई होगी.
डीएफओ के मुताबिक, भालू को सुरक्षित रेस्क्यू करने में वन विभाग की टीम को करीब 5 से 6 घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. ऑपरेशन के दौरान भालू के पंजे भी वन विभाग के कुछ कर्मचारियों को लगे, लेकिन कर्मचारियों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना रेस्क्यू अभियान जारी रखा.
पिंजरे में ले जाकर काटा गया कनस्तर
वन विभाग की टीम ने काफी प्रयास के बाद भालू को सुरक्षित तरीके से पिंजरे में पहुंचाया. इसके बाद उसके मुंह में फंसे कनस्तर को काटकर अलग किया गया. कनस्तर निकलने के बाद भालू को राहत मिली. डीएफओ कुलदीप जमवाल ने बताया कि रेस्क्यू के बाद भालू को सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया गया है. वन विभाग की टीम ने यह सुनिश्चित किया कि भालू को किसी तरह की गंभीर चोट न लगी हो और उसे उसके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाया जाए.
डलहौजी जैसे पर्यटन क्षेत्रों में जंगल से सटे इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही अक्सर देखने को मिलती है. इस घटना ने एक बार फिर इंसानी आबादी और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संपर्क के दौरान सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई के महत्व को सामने ला दिया है.