करनाल शुगर मिल को मिला राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार, तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास में लहराया परचम

करनाल शुगर मिल को तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास में लगातार चौथी बार मिला राष्ट्रीय प्रथम पुरस्कार। केंद्रीय मंत्रियों ने किया सम्मानित।

करनाल: हरियाणा की करनाल शुगर मिल को लगातार चौथी राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास में प्रथम पुरस्कार मिला है. नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (नई दिल्ली) ने 22 सितंबर 2026 को डॉक्टर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (विंडसर पैलेस, नई दिल्ली) में आयोजित मेगा ट्रिपल इवेंट में प्रथम पुरस्कार करनाल को दिया. लगातार चौथी बार करनाल को ये पुरस्कार मिला है. इसके अलावा वर्ष 2025-26 के लिए गन्ना विकास में हरियाणा के प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

करनाल शुगर मिल को प्रथम पुरस्कार: दोनों पुरस्कारों की ट्रॉफियां केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा में सहकारिता मंत्री डॉक्टर अरविंद कुमार शर्मा ने उपायुक्त एवं अध्यक्ष करनाल शुगर मिल डॉक्टर आनंद कुमार शर्मा और प्रबंध निदेशक, करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, अदिति को दी.

लगातार चौथी बार मिला सम्मान: ट्रॉफियां प्राप्त करने के बाद प्रबंध निदेशक अदिति ने बताया कि यह लगातार चौथी बार है. जब करनाल शुगर मिल को कम रिकवरी वाले क्षेत्र में तकनीकी दक्षता की प्रतिष्ठित ट्रॉफियों के साथ-साथ गन्ना विकास में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए करनाल शुगर मिल को गुणवत्ता आश्वासन के अंतरराष्ट्रीय मानक यानी आईएसओ 9001: 2015 से भी सम्मानित किया गया है और यह पिछले 15 वर्षों के दौरान यह सम्मान प्राप्त करने वाली हरियाणा की पहली मिल है.

शुगर मिल में हुई 48.10 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई: अदिति ने बताया कि पिछले पिराई सत्र यानि 2024-25 के दौरान, करनाल शुगर मिल ने 98.55 प्रतिशत की उच्चतम क्षमता उपयोग के साथ 48.10 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की. इस सत्र के दौरान करनाल शुगर मिल ने 4.55 लाख क्विंटल रिफाइंड चीनी का उत्पादन किया है. इसके अलावा, मिल ने हरियाणा के सभी सहकारी चीनी मिलों में पावर टरबाइन की पूरी निर्धारित क्षमता/दक्षता का उपयोग करके सत्र में 22.67 करोड़ रुपये की बिजली भी बेची.

1976 में हुई थी स्थापना: करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल की स्थापना 1976 में 116 एकड़ भूमि पर 1250 टीसीडी (प्रतिदिन पेराई क्षमता) की प्रारंभिक क्षमता के साथ की गई थी. इसका पहला पेराई सत्र 1976-77 में शुरू हुआ था. किसानों द्वारा गन्ने की खेती में वृद्धि के जवाब में, सरकार ने 1991-92 में मिल की क्षमता 1250 टीसीडी से बढ़ाकर 2200 टीसीडी कर दी. उन्होंने बताया कि किसानों को और अधिक सहायता देने तथा गन्ने की निरंतर उच्च खेती को समायोजित करने के लिए, राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्वर्ण जयंती परियोजना के तहत 2021 में एक और विस्तार किया, जिससे क्षमता बढक़र 3500 टीसीडी हो गई.

सल्फर-मुक्त रिफाइंड चीनी का उत्पादन: वर्तमान संयंत्र सल्फर-मुक्त रिफाइंड चीनी का उत्पादन करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करता है और सभी प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पूरी तरह से पालन करता है. यह मिल चीनी के अतिरिक्त उप-उत्पादों जैसे शीरा, बिजली, प्रेस मड और खोई का उत्पादन और बिक्री करके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को काफी मजबूत करती है. 18 मेगावाट सह-उत्पादन के साथ नवीनतम तकनीक के 3500 टीसीडी नए रिफाइंड शुगर प्लांट की स्थापना के बाद, करनाल शुगर मिल पिछले तीन वर्षों के दौरान नकद लाभ में आ गई है और करनाल शुगर मिल ने गन्ने का भुगतान किसानों को अपने स्वयं के स्रोतों से किया है.

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