राहुल गांधी ने अंकिता के परिजनों से की मुलाकात, सीबीआई जांच और फांसी की मांग पर अड़े परिवार वाले

उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा के खिलाफ माता-पिता ने इंडिया गेट पर धरना शुरू कर दिया है। राहुल गांधी ने भी परिजनों से मुलाकात की है।

उत्तराखंड की बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है। जबरन देह व्यापार के धंधे में धकेलने के विरोध पर सितंबर 2022 में अंकिता की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए पौड़ी गढ़वाल की जिला अदालत ने पिछले साल मुख्य दोषियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, अंकिता के माता-पिता ने इस फैसले को ‘अधूरा न्याय’ करार दिया है और दोषियों के लिए फांसी की सजा तथा मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना शुरू कर दिया है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर अंकिता के परिजनों से मुलाकात की और उनका ढांढस बंधाया।

🔍 क्या था पूरा मामला? ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में हुई थी वीभत्स वारदात

मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल जिले के डोभ श्रीकोट की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट नौकरी करती थी। सितंबर 2022 में वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी, जिसके दो दिन बाद उसका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। पुलिस जांच में यह खौफनाक सच सामने आया कि रिजॉर्ट का मालिक पुलकित आर्य (जो उत्तराखंड के एक प्रभावशाली पूर्व भाजपा नेता का बेटा है) अंकिता पर अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने का दबाव बना रहा था। विरोध करने पर उसकी हत्या कर शव नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

⚖️ परिजनों की मांग: राजनीतिक प्रभाव के चलते नहीं मिला पूर्ण न्याय, अब सीबीआई जांच और फांसी की सजा की गुहार

निचली अदालत द्वारा फांसी की सजा न सुनाए जाने और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों के चलते अंकिता के माता-पिता संतुष्ट नहीं हैं। अंकिता की मां सोनी देवी का कहना है कि उनकी बेटी के हत्यारों ने उनका पूरा परिवार उजाड़ दिया है, इसलिए दोषियों को फांसी से कम सजा मंजूर नहीं है। परिवार का यह भी आरोप है कि मामले की तह तक जाने और अन्य संलिप्त लोगों बेनकाब करने के लिए इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। परिजनों का यह धरना अब न्याय की आस में एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है।

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