कम उम्र की महिलाओं में बढ़ रहे स्तन कैंसर के मामले, PGI विशेषज्ञों ने बताए लक्षण और बचाव
PGI चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों, शुरुआती लक्षणों, भ्रांतियों और आधुनिक उपचार तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की है। जानें पूरी जानकारी।
चंडीगढ़। महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद समय पर जांच कराने को लेकर महिलाओं में झिझक और बीमारी से जुड़ी कई गलत धारणाएं आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। स्तन में गांठ होने पर दर्द न होना अक्सर महिलाओं को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि कोई गंभीर समस्या नहीं है, जिसके कारण जांच में देरी हो जाती है।
📊 हर आठ में से एक महिला में विकसित हो रहा खतरा: दर्द न होने को न समझें सुरक्षित
डॉ. दिव्या दहिया ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में इस बीमारी के मामलों में तेजी आई है। पहले 50-60 महिलाओं में से एक को यह समस्या होती थी, जबकि आज चंडीगढ़ में हर आठ में से एक महिला में इसके विकसित होने का जोखिम देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह केवल अधिक उम्र की महिलाओं की बीमारी नहीं है, बल्कि 20 से 40 वर्ष की युवतियों और गर्भवती महिलाओं में भी इसकी पहचान हो रही है। इसी तरह यह धारणा भी पूरी तरह गलत है कि यह केवल मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को होती है, दुबली-पतली और सामान्य बीएमआई वाली महिलाओं को भी यह हो सकता है। इसके अलावा, शुरुआत में दर्द न होने पर भी गांठ या त्वचा में बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
🔍 मैमोग्राफी स्क्रीनिंग और एडवांस स्कैन की भूमिका: भ्रांतियों से बचें और पूरा लें इलाज
डॉ. चंद्रिका भट्टाचार्य ने 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित मैमोग्राफी कराने और सेल्फ-ब्रेस्ट एग्जामिनेशन (स्वयं स्तन जांच) पर जोर दिया। पैडेड ब्रा पहनने या खास कपड़ों से कैंसर होने जैसी बातें केवल भ्रामक धारणाएं हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। वहीं, डॉ. अनीश भट्टाचार्य ने बताया कि बोन स्कैन, पेट स्कैन (PET Scan) और आधुनिक इमेजिंग तकनीकों से बीमारी के फैलाव और इलाज के असर का सटीक आकलन किया जाता है। विशेषज्ञों ने अंत में सलाह दी कि कैंसर की पुष्टि होने पर घरेलू नुस्खों के चक्कर में न पड़ें, इलाज को बीच में बिल्कुल न छोड़ें और समय पर सही उपचार लेकर पूरी तरह स्वस्थ रहें।