₹53,000 करोड़ की सबसे बड़ी विदेशी डील के बाद भी IDBI Bank के शेयरों में क्यों आई भारी गिरावट?
₹53,000 करोड़ की फेयरफैक्स डील के ऐलान के बावजूद गुरुवार को IDBI Bank के शेयर करीब 8 प्रतिशत टूट गए। जानें डील की पूरी डिटेल और सरकार-LIC की हिस्सेदारी का हाल।
कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स द्वारा IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 53,000 करोड़ रुपये (5.5 अरब डॉलर) में खरीदने के ऐतिहासिक सौदे की घोषणा के ठीक अगले ही दिन बैंक के शेयरों में बिकवाली की होड़ मच गई। शेयर बाजार में बंपर तेजी के बावजूद बीएसई (BSE) पर आईडीबीआई बैंक का शेयर करीब 8 प्रतिशत टूटकर 83.33 रुपये के स्तर पर आ गया। उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पहले बुधवार को डील की खबर आने से पूर्व शेयर में 9 प्रतिशत की तेजी देखी गई थी, जिससे बैंक का मार्केट कैप ₹8,086 करोड़ बढ़ा था। मार्च 2026 में यह शेयर ₹61.05 के 52 हफ्ते के निचले स्तर पर था, जबकि जनवरी 2026 में इसने ₹118.45 का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर छुआ था।
🤝 भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग फॉरेन इन्वेस्टमेंट: सरकार और LIC मिलकर बेचेंगी 60.72% हिस्सेदारी
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने फेयरफैक्स की सब्सिडयरी कंपनी ‘एम/एस 10955230 कनाडा इंक’ को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दे दी है। यह किसी भी भारतीय बैंक में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) होगा। इस डील के तहत कनाडाई कंपनी केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी ₹26,620 करोड़ में और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी ₹26,440 करोड़ में खरीदेगी।
🏛️ आईडीबीआई बैंक का इतिहास और वर्तमान शेयरहोल्डिंग का ढांचा
वर्तमान में IDBI बैंक में सरकार और एलआईसी के पास संयुक्त रूप से 94.71 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसमें केंद्र सरकार की 45.48% और एलआईसी की 49.24% हिस्सेदारी शामिल है। बाकी 5.29% शेयर सार्वजनिक और संस्थागत निवेशकों के पास हैं। मूल रूप से औद्योगिक विकास वित्त संस्थान के रूप में स्थापित इस बैंक की वित्तीय स्थिति बिगड़ने के बाद इसे एक कॉमर्शियल बैंक के रूप में पुनर्गठित किया गया था। मई 2017 में आरबीआई द्वारा पीसीए (PCA) फ्रेमवर्क में रखे जाने के बाद इसमें सरकार और एलआईसी ने कई बार पूंजी डाली थी। लंबी मशक्कत के बाद अब बैंक के विनिवेश और रणनीतिक बिक्री की प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लग गई है।