केवल शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से नहीं कर सकते वंचित, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, केवल शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। सहारनपुर बीएसए का आदेश रद्द।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी बेटी को केवल उसके शादीशुदा होने के आधार पर अनुकंपा ( compassionate) नियुक्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इससे स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता है, और संबंधित विभाग को याची की शैक्षिक योग्यता, परिवार की आर्थिक तंगी, आश्रित होने की स्थिति और पद की उपलब्धता जैसी अन्य सभी शर्तों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लेना होगा।

🏛️ सहारनपुर के बीएसए का आदेश रद्द: मनीषा त्यागी के मामले में 8 सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार करने का निर्देश

न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने सहारनपुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा 14 नवंबर 2024 को जारी किए गए उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें याची मनीषा त्यागी का दावा ठुकरा दिया गया था। कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया है कि वह आठ सप्ताह के भीतर सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से स्पष्ट आदेश पारित करे। बता दें कि मनीषा के पिता धर्मवीर सिंह प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे, जिनकी सेवाकाल के दौरान 14 मई 2015 को मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने 17 मई 2016 को नौकरी के लिए आवेदन किया था।

📜 विमला श्रीवास्तव केस का हवाला: नियमों से ‘अविवाहित’ शब्द पहले ही हटाया जा चुका है असंवैधानिक

विभाग ने पूर्व में मनीषा को शादीशुदा होने और टीईटी पास न होने का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोहराया कि ‘विमला श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में पूर्ण पीठ पहले ही नियमों से केवल ‘अविवाहित’ बेटियों को शामिल करने के प्रावधान को असंवैधानिक करार दे चुकी है, जिसके बाद सरकार ने 12 नवंबर 2021 को नियमों से यह शब्द हटा दिया था। कोर्ट ने माना कि चूंकि मृतका के आश्रित ने समय पर आवेदन किया था, इसलिए विभागीय देरी का खामियाजा याची को नहीं भुगतना चाहिए।

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