‘बैंक मजबूत तो बेचे क्यों जा रहे?’ अखिलेश यादव ने पूछे ब्याज, यूपीआई और केवाईसी से जुड़े तीखे सवाल

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने '12 साल, 12 सवाल' के जरिए बीजेपी सरकार पर साधा निशाना। बैंकिंग व्यवस्था, केवाईसी, लोन और डिजिटल फ्रॉड पर पूछे तीखे सवाल।

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर जोरदार हमला बोला है। इस बार उन्होंने देश और प्रदेश की बैंकिंग व्यवस्था की बदहाली को मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर ‘बारह साल, बारह सवाल’ शीर्षक से एक विस्तृत पोस्ट शेयर की है, जिसमें उन्होंने बैंकों के निजीकरण, होम लोन की ब्याज दरों, केवाईसी के नाम पर उत्पीड़न और डिजिटल फ्रॉड जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा है।

🏦 ‘बैंक मजबूत हैं तो फिर बेचे क्यों जा रहे हैं?’: ब्याज दरों, पेनल्टी और साइबर ठगी पर पूछे तीखे प्रश्न

सपा प्रमुख ने अपने 12 प्रमुख सवालों में सरकार से पूछा कि अगर बैंकिंग तंत्र मजबूत हुआ है तो सरकारी बैंकों को निजी हाथों में क्यों बेचा जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूनतम बैलेंस न होने पर गरीबों के खातों से अरबों रुपये पेनल्टी के नाम पर काटे जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि बुजुर्गों और युवाओं को बार-बार बायोमेट्रिक या ऑनलाइन केवाईसी के नाम पर क्यों परेशान किया जाता है? उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि साइबर ठगी का शिकार हुए आम नागरिकों का पैसा तुरंत वापस करने के बजाय उन्हें थानों और बैंकों के चक्कर क्यों कटवाए जाते हैं।

📢 ‘आपका खाता, देता घाटा’: बैंक कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव और जन-धन खातों की उपेक्षा पर जताई चिंता

अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘आपका खाता, भाग्यविधाता’ का नारा देने वाली सरकार का सच अब ‘आपका खाता, देता घाटा’ बन चुका है। उन्होंने कहा कि किसानों, छात्रों और छोटे व्यापारियों को लोन पाने के लिए सिबिल (CIBIL) स्कोर, गारंटर और दलालों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि बड़े बकाएदारों का कर्ज आसानी से माफ कर दिया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने बैंक कर्मचारियों की नई भर्तियों में देरी, उन पर बढ़ते अत्यधिक कार्य-दबाव और जन-धन खातों में ज़ीरो बैलेंस पर माइनस चार्ज लगाने जैसी समस्याओं पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

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