दिन में सचिवालय में PA, रात में रामलीला में ‘श्रवण कुमार’ बन रहे सुशील गर्वाण, पूरा परिवार समर्पित

हरियाणा में सचिवालय के PA सुशील गर्वाण दिन में प्रशासनिक सेवा और रात में रामलीला में निभा रहे हैं अहम किरदार। गर्वाण परिवार की अनूठी परंपरा।

हरियाणा। दिन के वक्त सचिवालय में ओएसडी के निजी सहायक (PA) की बड़ी जिम्मेदारी संभालना और रात ढलते ही पूरी निष्ठा व श्रद्धा के साथ प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित हो जाना—यह प्रेरणादायक कहानी है सुशील गर्वाण की। रामलीला और सनातन संस्कृति के प्रति अटूट प्रेम का ऐसा ही अद्भुत उदाहरण हरियाणा का गर्वाण परिवार पेश कर रहा है, जिसकी कला और समर्पण की चर्चा हर तरफ हो रही है। सुशील गर्वाण वर्ष 2000 से लगातार रामलीला में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस बार वे मंच पर ‘श्रवण कुमार’ की बेहद भावुक और मार्मिक भूमिका निभाकर दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। इससे पहले वे भगवान श्रीराम के अनुज ‘लक्ष्मण’ का किरदार भी बखूबी निभा चुके हैं। इसके अलावा इस वर्ष उन्होंने ताड़िका, मंथरा और मामा मारीच जैसे चुनौतीपूर्ण और अलग-अलग पात्रों का मंचन कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

🌟 संस्कारों और परंपरा की जीवंत मिसाल है ‘गर्वाण परिवार’: पीढ़ियों से रामलीला को समर्पित है पूरा परिवार

सुशील गर्वाण का पूरा परिवार पिछले कई दशकों से प्रभु श्रीराम की सेवा और रामलीला के आयोजन में जुटा हुआ है। उनके पिता कुंवर लाल गर्वाण रामलीला के वरिष्ठ उपप्रधान के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनके बड़े भाई सुनील गर्वाण पहले ही रामलीला में मुख्य ‘प्रभु श्रीराम’ की गरिमामय भूमिका निभा चुके हैं। गर्वाण परिवार की यह परंपरा केवल अभिनय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कारों, अटूट श्रद्धा और अनुशासन की एक अनूठी मिसाल है। यह परिवार पीढ़ियों से भारतीय संस्कृति और रंगमंच की महान परंपरा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है, जो आज के समाज और युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ा प्रेरणा स्रोत है।

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