क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो में छाए प्रणव सूरमा, पेरिस पैरालंपिक के बाद एशियाई खेलों में रचा इतिहास

फरीदाबाद के पैरा एथलीट प्रणव सूरमा ने एशियन पैरा गेम्स-2026 में दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। जानिए उनकी प्रेरणादायक संघर्ष यात्रा।

एशियन पैरा गेम्स-2026 में भारत का गौरव बढ़ाने वाले फरीदाबाद के स्टार पैरा एथलीट प्रणव सूरमा की सफलता के पीछे कड़ा संघर्ष, पारिवारिक सहयोग और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा छिपा है। प्रणव ने क्लब थ्रो एफ-51 स्पर्धा में 32.87 मीटर का थ्रो कर गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम किया, जबकि डिस्कस थ्रो में 11.66 मीटर का शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियाई रिकॉर्ड कायम किया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के लिए रवाना होने से ठीक पहले अपने दादाजी को खोने के गहरे मानसिक आघात और साल 2011 के एक सड़क हादसे के बाद व्हीलचेयर पर जीवन बिताने जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए प्रणव ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। उनके पिता संजीव सूरमा ने भी बेटे की इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि विदेश की धरती पर भारत का तिरंगा लहराते देखना और राष्ट्रगान सुनना उनके लिए सबसे भावुक पल है।

🎯 हादसे से लेकर अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड तक का सफर: कभी हार न मानने का जज्बा ही असली जीत

साल 2011 में हुए एक गंभीर सड़क हादसे ने प्रणव की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी, जहां डॉक्टरों ने उनके दोबारा चल पाने तक की उम्मीद छोड़ दी थी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, अपनी पढ़ाई जारी रखी, बैंक में नौकरी की और साल 2018 में पैरा एथलेटिक्स की शुरुआत की। कोच नवल के मार्गदर्शन और परिवार के अटूट समर्थन के दम पर उन्होंने अपनी वापसी दर्ज की। पेरिस पैरालंपिक-2024 में रजत पदक जीतने के बाद अब एशियन पैरा गेम्स में दो गोल्ड मेडल अपने नाम करने वाले प्रणव का अगला लक्ष्य आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप और पैरालंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उनका यह प्रेरणादायक सफर यह साबित करता है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि इंसान अटूट अनुशासन और सकारात्मक सोच रखे, तो हर मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

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