इजराइल चुनाव के बाद भी क्यों अटकी है बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता? जानिए कैसे दोबारा पीएम बनने के बन रहे समीकरण
इजराइल चुनाव में बहुमत न मिलने के बावजूद बेंजामिन नेतन्याहू के पीएम बने रहने के समीकरण जानिए। विपक्ष में फूट और सरकार गठन के 5 मुख्य रास्ते।
इजराइल में चुनाव से ज्यादा, चुनाव के बाद अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसकी चर्चा जोरों पर है। बीते महीने हुए चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 120 सदस्यीय संसद में सिर्फ 53 सीटें मिली हैं, जबकि उनके विरोधी दलों को कुल 67 सीटें हासिल हुई हैं जो कि बहुमत के आंकड़े (61) से ज्यादा हैं। यदि सीधे तौर पर आंकड़ों को देखा जाए, तो नेतन्याहू को सत्ता छोड़नी पड़ेगी क्योंकि उनके पास 61 सीटों का स्पष्ट बहुमत नहीं है। मगर जमीनी आंकड़े और राजनीतिक समीकरण इतने साफ नहीं हैं। इजराइल में वर्तमान में ऐसे हालात बन रहे हैं, जिससे इस बात की प्रबल उम्मीद जगी है कि तमाम विरोध के बावजूद नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।
🗳️ विपक्ष को मिला 67 सांसदों का समर्थन, फिर भी सरकार बनना क्यों है मुश्किल?
पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट और विपक्षी दलों की चुनौतियां:
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विपक्ष का समर्थन: पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति के सामने 67 सांसदों का समर्थन भी मिल गया है।
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अंदरूनी मतभेद: इसके बावजूद नेतन्याहू की सत्ता का अंत होना तय नहीं है, क्योंकि आइजेनकोट के समर्थन में शामिल सभी दल आपस में एक साथ सरकार बनाने को तैयार नहीं हैं। खासकर अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर विपक्षी दलों के बीच गहरे वैचारिक मतभेद हैं।
🧩 वे 5 समीकरण, जिनके सहारे बेंजामिन नेतन्याहू बचा सकते हैं अपनी कुर्सी
इजराइल में सरकार गठन के संभावित रास्ते:
1️⃣ विपक्ष में फूट और वैचारिक मतभेद
इजराइल की 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 और गादी आइजेनकोट के विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं। इनके समर्थन से 67 का आंकड़ा बनता है, लेकिन विपक्षी दल अरब पार्टियों के समर्थन पर एकमत नहीं हैं। इस आपसी फूट का सीधा फायदा नेतन्याहू को मिल सकता है।
2️⃣ छोटे दलों और पुराने सहयोगियों का समर्थन
नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से 8 सीट पीछे है, ऐसे में उन्हें विपक्षी खेमे या छोटे दलों का समर्थन जुटाना होगा। उनकी पुरानी सहयोगी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टी यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) के पास 7 सीटें हैं। धार्मिक छात्रों को सैन्य सेवा से छूट देने के मुद्दों पर मतभेद के कारण इस बार पार्टी ने समर्थन नहीं दिया है। यदि नेतन्याहू इन्हें मनाने में सफल रहे, तो उन्हें बहुमत के लिए सिर्फ एक और सांसद की जरूरत होगी।
3️⃣ राष्ट्रपति द्वारा सरकार बनाने का दूसरा मौका
इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग पहले आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं, जिसके लिए 28 दिन (और जरूरत पड़ने पर 14 दिन का अतिरिक्त समय) मिलता है। यदि आइजेनकोट बहुमत जुटाने में नाकाम रहते हैं, तो राष्ट्रपति किसी अन्य सांसद को न्योता देंगे। इस स्थिति में नेतन्याहू भी मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकते हैं।
4️⃣ राष्ट्रीय एकता सरकार और रोटेशन फॉर्मूला
यदि नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच कोई राजनीतिक समझौता हो जाता है, तो दोनों खेमे मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बना सकते हैं। इसमें प्रधानमंत्री पद साझा करने यानी ‘रोटेशन’ का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। हालांकि, आइजेनकोट पहले ही नेतन्याहू के नेतृत्व में काम करने से इंकार कर चुके हैं, इसलिए इसके लिए दोनों नेताओं को अपने रुख में नरमी लानी होगी।
5️⃣ सरकार गठन में नाकामी के बाद दोबारा चुनाव
यदि सरकार बनाने की सभी कोशिशें विफल हो जाती हैं, तो इजराइल में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) के नियमों के मुताबिक, पहली कोशिश के बाद दूसरे और तीसरे सांसद को भी मौका मिल सकता है। अगर तब भी बहुमत नहीं जुटा, तो संसद भंग हो जाएगी और नए चुनाव होंगे। इस पूरी लंबी प्रक्रिया के दौरान नेतन्याहू की मौजूदा सरकार ‘कार्यवाहक सरकार’ के रूप में काम करती रहेगी और वह प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे।