पानीपत में इंसानियत शर्मसार: बेटियों ने पिता का अंतिम संस्कार करने से किया साफ इनकार, जनसेवा दल ने वीडियो कॉल पर दिखाया अंतिम संस्कार
पानीपत में बेटियों और परिजनों ने पिता का अंतिम संस्कार करने से इनकार किया। जनसेवा दल ने वीडियो कॉल पर दिखाया अंतिम संस्कार। पूरी मार्मिक खबर पढ़ें।
पानीपत: आज समाज के सामने एक ऐसा मार्मिक मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत, संवेदनाओं और माता-पिता-संतान के रिश्तों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश के जिला सिंगरौली के रहने वाले लगभग 65 वर्षीय सुशील कुमार सिंह, जो पानीपत के ददलाना गांव में टाउनशिप के सामने राधा स्वामी कॉलोनी में रहते थे और पहले रिफाइनरी में नौकरी करते थे, अचानक सीने में तेज दर्द उठने के कारण इस दुनिया को अलविदा कह गए।
🏥 पुलिस ने परिजनों से किया संपर्क; दूर होने और आने में असमर्थता जताते हुए परिवार ने आने से किया मना
परिजनों की बेरुखी और असंवेदनशीलता:
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पुलिस की सूचना: अचानक हुई मौत के बाद कॉलोनी के लोगों ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और परिजनों से संपर्क कर सुशील कुमार के निधन की जानकारी दी तथा पानीपत आकर अंतिम संस्कार करने को कहा।
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परिवार का जवाब: लेकिन परिवार की ओर से साफ जवाब मिला कि वे बहुत दूर रहते हैं और पानीपत नहीं आ सकते। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव सामाजिक संस्था जनसेवा दल को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया।
📹 दामाद ने बेंगलुरु से आने से किया इनकार; अंत में जनसेवा दल ने वीडियो कॉल पर दिखाया अंतिम संस्कार
वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम विदाई:
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बेटियों से गुहार: जनसेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने जब बेटियों से संपर्क किया तो पता चला कि सुशील कुमार की पांच बेटियां हैं, जिनकी पत्नी बीमार रहती हैं। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है और दो अविवाहित हैं। संस्था ने आने-जाने का टिकट खर्च देने की पेशकश भी की, लेकिन बेटियों ने आने से इंकार कर दिया।
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रिश्तेदारों और दामादों की चुप्पी: जब चाचा, मामा या अन्य रिश्तेदारों से संपर्क किया गया तो कोई भी आगे नहीं आया। बेंगलुरु में रहने वाले एक दामाद ने भी आने में असमर्थता जताई। अंत में परिवार ने कहा कि आप ही अंतिम संस्कार कर दीजिए और हमें वीडियो कॉल पर दिखा दीजिए। संस्था ने वीडियो कॉल के जरिए ही बेटियों को उनके पिता का अंतिम संस्कार दिखाया, जिसे देख कुछ बेटियां भावुक भी हुईं।
🌊 अस्थियां लेने से भी किया इनकार; सचिव चमन गुलाटी ने उठाए समाज और रिश्तों पर गंभीर सवाल
जनसेवा दल की पीड़ा और सवाल:
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अस्थि विसर्जन से भी इंकार: संस्कार के बाद जब परिवार से पूछा गया कि क्या वे अपने पिता की अस्थियां लेने आएंगे, तो जवाब मिला कि आप ही हरिद्वार में अस्थियां विसर्जित कर दीजिए, हम नहीं आ पाएंगे।
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चमन गुलाटी का बयान: जनसेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने भावुक होते हुए कहा, “हम परमात्मा से संतान इसलिए मांगते हैं कि जीवन के अंतिम पड़ाव में वे माता-पिता का सहारा बनें। जिस पिता ने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के भविष्य के लिए लगा दी, क्या उनके अंतिम संस्कार के लिए भी परिवार के पास समय नहीं है? क्या रिश्तों से बढ़कर पैसा और दूरी हो गई है?”
🤲 जनसेवा दल ने निभाया मानवता का धर्म; पूरे विधि-विधान से कराया गया अंतिम संस्कार
मानवीय सेवा का कार्य:
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जिम्मेदारी और सम्मान: संस्था का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और विधि-विधान से होना चाहिए। चाहे कोई लावारिस हो, बेसहारा हो या जिसके अपने मुंह मोड़ लें, जनसेवा दल उसे अकेला नहीं छोड़ता।
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अंतिम संस्कार में सहयोग: इस सेवा कार्य में किशन मनचंदा, चमन गुलाटी, कमल गुलाटी, समाजसेवी सतीश चुघ, बंटी गांधी, वासुदेव तथा युवा समाजसेवी मदन साइकिल वाले ने मिलकर पूरे विधि-विधान के साथ सुशील कुमार सिंह का अंतिम संस्कार संपन्न कराया।