अमृतसर से पूर्णिया जाने वाली जनसेवा एक्सप्रेस में पैर रखने की जगह नहीं, जान जोखिम में डालकर यात्रा

दीवाली और छठ पर ट्रेनों में भारी भीड़। सहारनपुर जंक्शन पर जनसेवा एक्सप्रेस में टॉयलेट तक में सफर करते दिखे यात्री। जान जोखिम में डालकर यात्रा। पूरी खबर पढ़ें।

दूसरे राज्यों में रोजगार, कारोबार और पढ़ाई करने वाले लोग बड़ी संख्या में अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। दीवाली और उसके तुरंत बाद आने वाले महापर्व छठ के कारण इस समय देश भर की ट्रेनें खचाखच भरी हुई हैं। पंजाब और हरियाणा से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तथा बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों में हालात इतने बदतर हैं कि डिब्बों के भीतर पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। त्योहार के इस मौके पर गोरखपुर, बिहार और यूपी के विभिन्न जिलों में जाने वाले कई यात्रियों को मजबूरन टॉयलेट (शौचालय) के अंदर बैठकर सफर करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि लोग ट्रेन के दरवाजों और पायदान पर लटककर अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जंक्शन पर ऐसी ही तस्वीरों से भरी अमृतसर से चलकर बिहार के पूर्णिया जाने वाली ‘जनसेवा एक्सप्रेस’ जब पहुँची, तो हर कोई दंग रह गया।

🚉 सहारनपुर जंक्शन पर उमड़ी भारी भीड़; अमृतसर से पूर्णिया जा रही जनसेवा एक्सप्रेस में खड़ा होना भी हुआ मुश्किल

सहारनपुर जंक्शन का नजारा और यात्रियों की भीड़:

  • ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं: जनसेवा एक्सप्रेस ट्रेन जब सहारनपुर जंक्शन पर पहुँची तो उसके डिब्बों में भारी भीड़ थी। जिन लोगों ने कई महीने पहले रिजर्वेशन करा लिया था, वे तो किसी तरह अंदर पहुँच गए, लेकिन जिन्हें आरक्षित टिकट नहीं मिल पाया, उनकी मुश्किलें चरम पर थीं।

  • यात्री निर्मल कुमार की जुबानी: बिहार के पूर्णिया जाने वाले एक यात्री निर्मल कुमार ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया, “मैं सुबह 11 बजे से ट्रेन के टॉयलेट के अंदर बैठा हूँ और कल शाम पाँच बजे तक उतरूँगा। मैंने एक महीना पहले रिजर्वेशन की पूरी कोशिश की थी, लेकिन टिकट नहीं मिला।” वहीं रामपुर के एक अन्य यात्री ने बताया कि मजबूरी में उन्हें शौचालय के अंदर बैठकर ही यात्रा करनी पड़ रही है।

⚠️ जान हथेली पर रखकर सफर करने को विवश लोग; जनरल डिब्बों में भी तिल रखने की जगह नहीं

यात्रियों का संघर्ष और प्रशासनिक स्थिति:

  • लटककर यात्रा करने की मजबूरी: रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े कई अन्य यात्रियों ने बताया कि उन्हें जनरल डिब्बे में बैठने या खड़े होने तक के लिए भी जगह नहीं मिल पाई है। मजबूरी में लोग दरवाजों और खिड़कियों के पास लटककर यात्रा कर रहे हैं।

  • त्योहार का उत्साह और विवशता: गोरखपुर जा रहे एक यात्री ने कहा कि वे दीवाली और छठ मनाने अपने घर जा रहे हैं, इसलिए सफर चाहे कैसा भी हो, उन्हें जाना ही है। कुल मिलाकर यात्रियों के चेहरों पर अपने परिवार के पास पहुँचने का भारी उत्साह तो है, लेकिन रास्ते का यह सफर उनकी जान को खतरे में डालने वाला साबित हो रहा है।

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