ईरान-इजराइल युद्ध का असर: ड्राई फ्रूट्स 30% महंगे, चावल निर्यात में भारी गिरावट
पश्चिम एशिया में युद्ध से खारी बावली मंडी में बादाम, पिस्ता और अंजीर के दाम 30% तक बढ़े। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत का चावल निर्यात 35% प्रभावित। जानें नई दरें।
पश्चिम एशिया में ईरान के साथ इजराइल और अमेरिका के युद्ध का असर भारत के आयात-निर्यात पर भी पड़ रहा है. सबसे ज्यादा असर सूखे मेवों के आयात और चावल के निर्यात पर देखने को मिल रहा है. ईरान के साथ-साथ अफगानिस्तान से भी सूखे मेवे भारत नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिसके कारण इनकी कीमतों में करीब 25 से 30% तक का इजाफा हुआ है.
19 अप्रैल से शादी का सीजन भी शुरू हो रहा है, जिससे सूखे मेवों की मांग बढ़ेगी और कीमतों में लगभग 10 से 15% तक और बढ़ोतरी हो सकती है. दिल्ली की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट मंडी खारी बावली के बड़े कारोबारी सनी के मुताबिक, ईरान से आने वाले मामरा बादाम, पिस्ता, पिस्ता मगज, अंजीर, हींग, खजूर और बादाम की कीमतों में 25% तक बढ़ोतरी हो चुकी है. मुनक्का, खजूर, ईरानी रिंग, खुबानी और शाहजीरा में भी 10 से 15% तक का इजाफा हुआ है. ईरान और दुबई से आने वाले ड्राई फ्रूट्स या तो रास्ते में फंसे हुए हैं या वहां से निकल ही नहीं पाए हैं और पोर्ट पर ही डंप हो गए हैं. इससे दिल्ली के व्यापारियों और ईरान के निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है.
इतने रुपये में मिल रहा है बादाम और पिस्ता
इस समय दिल्ली में बादाम 1240 रुपये, पिस्ता 1500 रुपये, अंजीर 1600 रुपये, हींग 6000 रुपये और खुबानी 800 रुपये प्रति किलो बिक रही है. इन सभी के दाम में पहले ही 10 से 15% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. वहीं, 19 अप्रैल से शादी के सीजन की शुरुआत के बाद कीमतों में 10 से 15% तक और इजाफे की उम्मीद है. यानी जिन घरों में शादी है, उनकी जेब पर सूखे मेवे खरीदने का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सूखे मेवे दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है.
चावल एक्सपोर्ट पर भी पड़ा है असर
ड्राई फ्रूट व्यापारी सनी ने बताया कि आयात के साथ-साथ भारत के चावल निर्यात पर भी होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने का असर पड़ा है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है. ईरान को सेला चावल और बासमती चावल का सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है. लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से चावल का निर्यात 30 से 35% तक कम हो गया है. दरअसल, भारत के कई राज्यों से अलग-अलग किस्म के बासमती चावल खाड़ी देशों में भेजे जाते हैं. पिछले एक महीने से चावल का निर्यात प्रभावित हुआ है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण अब वैकल्पिक मार्गों से चावल भेजने की कोशिश की जा रही है, जिससे भाड़ा और लागत 4 गुना तक बढ़ गई है.
होर्मुज स्ट्रेट बन रहा संकट
दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गुप्ता का कहना है कि ज्यादातर कंटेनर यूरोप और अमेरिका जाने वाले जहाजों से भेजे जाते थे, जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं जा पा रहे हैं. लंदन की एक कंपनी ने चावल का बीमा भी रोक दिया है, जिससे जोखिम और बढ़ गया है. कुछ व्यापारी ओमान के रास्ते सड़क मार्ग से खाड़ी देशों में चावल पहुंचा रहे हैं, जिससे लागत 4 गुना तक बढ़ गई है. यही वजह है कि चावल के निर्यात पर करीब 30 से 35% तक असर पड़ा है.
नरेश गुप्ता ने बताया कि चावल निर्यातक मोहित के अनुसार, कंटेनरों में चावल भरा हुआ है, लेकिन वह विदेश नहीं जा पा रहा है, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है. बड़े व्यापारी तो महंगा भाड़ा देकर अलग-अलग रास्तों से माल भेज रहे हैं, लेकिन छोटे व्यापारी, जो महीने में दो-चार कंटेनर ही भेजते थे, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है. अब यह देखना होगा कि यह युद्ध कितने समय तक चलता है और इसका भारत के आयात-निर्यात पर कितना गहरा असर पड़ता है. फिलहाल व्यापारी काफी चिंतित नजर आ रहे हैं.