हिंदू और जैन धर्म में व्रतों और त्योहारों का विशेष महत्व है. इन्हीं महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है रोहिणी व्रत. जैन समुदाय में इस व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इस व्रत को सच्ची श्रद्धा से रखता है, उसके जीवन से दरिद्रता दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है. आइए जानते हैं रोहिणी व्रत का महत्व, पूजा विधि और इसे 3, 5 या 7 साल तक रखने के विशेष नियम क्या हैं.
रोहिणी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसके बाद मंदिर या घर में भगवान वासुपूज्य की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर पूजा की जाती है. पूजा के दौरान फल, फूल, धूप, दीप अर्पित किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है. कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं या केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं. जैन धर्म के अनुसार, इस दिन संयम, दया और अहिंसा का पालन करना बहुत ही आवश्यक माना जाता है.
रोहिणी व्रत को एक विशेष अवधि तक नियमित रूप से करने का भी विधान है. आमतौर पर श्रद्धालु इसे 3, 5 या 7 सालों तक करते हैं. हर अवधि का अपना अलग महत्व बताया गया है:
यदि आप कम समय के लिए संकल्प लेना चाहते हैं, तो इस व्रत को लगातार 3 सालों तक हर महीने आने वाले रोहिणी नक्षत्र के दिन रखा जाता है.
5 सालों तक व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और आर्थिक व पारिवारिक परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं.
यह सबसे पूर्ण और श्रेष्ठ माना जाता है. 7 सालों तक रोहिणी व्रत करने से आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों की शुद्धि और जीवन में दीर्घकालिक सुख-समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है.
अगर आप 3, 5 या 7 वर्ष, जितने भी समय का संकल्प लेते हैं, उसकी अवधि पूरी होने पर इस व्रत का विधि-विधान से उद्यापन करना अनिवार्य होता है. उद्यापन के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान-पुण्य किया जाता है और भगवान वासुपूज्य की विशेष आराधना की जाती है.
रोहिणी व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है. व्रत के दिन क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए. सात्विक आहार लेना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस व्रत का अहम हिस्सा है. इसके साथ ही, जैन धर्म में जीव दया का विशेष महत्व है, इसलिए इस दिन किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने की सलाह दी जाती है.
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