उत्तर प्रदेश 2027 चुनाव: सीएम आवास पर बीजेपी की बड़ी बैठक, राज्यसभा उम्मीदवारों पर मंथन
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी बैठक। मुख्यमंत्री आवास पर राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के उम्मीदवारों के नामों पर मंथन। जानिए पूरी रणनीति।
उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारी के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब संगठन से लेकर सदन तक अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने में जुटी है. आज मुख्यमंत्री आवास पर बीजेपी की कोर कमेटी की अहम बैठक हो रही है. बैठक में राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के बचे हुए उम्मीदवारों के नामों पर मंथन हो रहा है. राज्यसभा की 10 सीटों में से 8 सीटों पर बीजेपी और उसके सहयोगियों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है.
ऐसे में सवाल सिर्फ ये नहीं है कि 8 सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा.. बल्कि बड़ा सवाल ये है कि बीजेपी किन चेहरों के जरिए 2027 का जातीय और क्षेत्रीय गणित साधना चाहती है? क्योंकि राज्यसभा के साथ-साथ 11 स्नातक-शिक्षक सीटों का विधान परिषद चुनाव भी सामने है और बीजेपी के लिए ये दोनों चुनाव 2027 से पहले संगठन, सामाजिक समीकरण और नेतृत्व की पसंद का संकेत देने वाले है. आइए जानते हैं कि इन दोनों चुनाव को लेकर बीजेपी क्या रणनीति बना रही है?
सीएम आवास पर बड़ी बैठक
आज सुबह मुख्यमंत्री आवास पर बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक हुई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह समेत वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल हैं. बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा राज्यसभा के उम्मीदवारों का पैनल तैयार करना रहा. राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होना है. इनमें से 8 सीटें फिलहाल बीजेपी के खाते में हैं.
हर सीट पर तीन नामों का पैनल
बीजेपी प्रदेश नेतृत्व हर सीट के लिए करीब तीन-तीन नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेज सकता है यानी करीब 24 नामों में से केंद्रीय नेतृत्व अंतिम चेहरों पर फैसला करेगा. बीजेपी की बैठक का दूसरा बड़ा विषय विधान परिषद की 11 सीटों का चुनाव भी है. इनमें 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हैं. 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी. बीजेपी पहले ही पांच उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है.
जातीय समीकरण कितना अहम?
राज्यसभा और विधान परिषद के उम्मीदवार भले ही अलग चुनाव लड़ेंगे लेकिन बीजेपी के सामने 2027 का विधानसभा चुनाव भी है. यही वजह है कि उम्मीदवारों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को महत्व दिए जाने की चर्चा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, अवध, ब्रज और बुंदेलखंड…हर क्षेत्र की अपनी राजनीतिक और सामाजिक संरचना है. इसी तरह पिछड़े वर्गों, दलितों, सवर्णों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन भी उम्मीदवार चयन में महत्वपूर्ण हो सकता है.
क्या पुराने चेहरों पर भरोसा या नए चेहरों को मौका?
बीजेपी से अरूण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है. डॉ. दिनेश शर्मा ने उपराज्यपाल बनने के बाद इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि डॉ. दिनेश शर्मा की जगह हरीश द्विवेदी को मौका दिया जा सकता है. वहीं, राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी के नाम की भी चर्चा है. सूत्रों की ओर से वरुण गांधी के नाम की भी चर्चा बताई जा रही है. बताया जा रहा है कि इस बार अधिकतर नए चेहरे राज्यसभा जाएंगे. वहीं केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा रिपीट हो सकते हैं.