गाजियाबाद में सख्त हुए नियम, एक अक्टूबर से लागू नई गाइडलाइंस और शुल्क की पूरी जानकारी
गाजियाबाद में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए नए नियम लागू हो गए हैं। दो साल से अधिक पुराने 1500 से ज्यादा आवेदन रद्द कर दिए गए हैं।
गाजियाबाद में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। नए नियम लागू होने के बाद पिछले दो साल से लंबित पड़े पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के 1500 से अधिक आवेदन एसडीएम कार्यालय द्वारा रद्द कर दिए गए हैं। इनमें वे तमाम आवेदन शामिल हैं, जिनके दस्तावेजों और जन्म-मृत्यु की घटना की सत्यता को लेकर अधिकारियों को संदेह था। लंबे समय से पेंडिंग इन पुरानी फाइलों का निस्तारण करते हुए एक अक्टूबर से जिले में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नई गाइडलाइंस और नियम लागू कर दिए गए हैं।
⚖️ दो साल से अधिक देरी होने पर अब अदालत के चक्कर काटने होंगे अनिवार्य
अब तक तय समय सीमा के बाद प्रमाण पत्र एसडीएम कार्यालय से जांच के बाद जारी किए जाते थे, लेकिन नए नियमों के तहत यदि जन्म या मृत्यु के दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं बनवाया गया है, तो इसे केवल अदालत के आदेश के बाद ही जारी किया जाएगा। इसके लिए अब आवेदकों को वकील के माध्यम से न्यायालय में आवेदन करना होगा। गाजियाबाद, मोदीनगर और लोनी एसडीएम कार्यालयों में ऐसे 1500 से ज्यादा आवेदकों को अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा, क्योंकि अधिकारियों द्वारा संदेह के दायरे में आए आवेदनों को खारिज कर दिया गया है।
💰 जानिए क्या हैं नए नियम और अलग-अलग समयावधि के लिए निर्धारित शुल्क
प्रशासन द्वारा स्पष्ट नियमों के तहत विलंब शुल्क और प्रक्रिया निर्धारित की गई है:
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21 दिनों के भीतर: नगर निगम या नगर पालिका के माध्यम से पूरी तरह निशुल्क।
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21 से 30 दिन के अंदर: 20 रुपये विलंब शुल्क के साथ।
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30 दिन से एक साल के अंदर: पुलिस जांच के बाद 50 रुपये विलंब शुल्क।
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एक से दो साल के बीच: जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत मजिस्ट्रेट के आदेश और 100 रुपये विलंब शुल्क पर अनुमति।
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दो साल के बाद: दो वर्ष या उससे अधिक की देरी होने पर केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट) के आदेश और सत्यता की जांच के बाद ही प्रमाण पत्र बनेगा।